इंडोनेशिया में सुनामी से भारी तबाही, मरने वालों की संख्या 400 पार, बारिश से बचाव में दिक्कत

429 people died in tsunami in Indonesia

इंडोनेशिया में शनिवार रात आई सुनामी से भयंकर तबाही मच गई। खतरा अभी भी टला नहीं है। अब तक मरने वालों की संख्या 400 का आकंडा पार कर चुकी है। बता दें कि सुनामी से पहले लोगों को किसी तरह की चेतावनी भी नहीं मिल पाई थी, इसलिए प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ गई। सुनामी से पहले यहां कोई भूकंप भी नहीं आया। ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि सुनामी ज्वालामुखी में विस्फोट की वजह से आई। ज्वालामुखी अब भी सक्रिय है, इसलिए खतरा बना हुआ है।

रिपोर्ट अनुसार इंडोनेशिया में शनिवार रात को सुनामी से आधे घंटे पहले Anak Krakatau ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था। हालांकि, यह पहला विस्फोट नहीं था, बीते कुछ हफ्ते में ज्वालामुखी में कई बार विस्फोट हुए हैं। लेकिन इस बार विस्फोट से समुद्र में भारी मात्रा में पानी एक जगह से दूसरी जगह अचानक बढ़ने लगा। स्थानीय समयानुसार रात साढ़े नौ बजे दक्षिणी सुमात्रा और पश्चिमी जावा के पास समुद्र की ऊंची लहरें तटों को पार कर आगे बढ़ीं। इससे सैकड़ों मकान नष्ट हो गए। इस भयावह सुनामी ने चारों तरफ तबाही मचाई, जिसमें जान-माल की काफी क्षति हुई है जिसने विनाशकारी रूप ले लिया। मरने वालों की संख्या रोज बढ़ती जा रही है। कल 373 लोगों के मरने की खबर आई थी जो कि आज बढ़कर 429 हो गई है और 1,400 से अधिक लोग घायल भी हैं।कुत्तों और भारी मशीनरी की मदद के साथ बचावकर्मी मलबे के हर ढेर को खंगाल रहे हैं जो त्रासदी से पहले स्थानीय लोगों के घर और दुकानें थीं।

देश की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता स्तुपो पूर्वो नुग्रोहो ने बताया कि मरने वालों की संख्या मंगलवार को बढ़कर 429 हो गई और कम से कम 128 लोग लापता हैं। शवों की खोज में लगे सैनिकों, सरकारी कर्मियों और स्वयंसेवियों को तटों पर फैले मलबे में शव मिले और रोते-बिलखते परिजनों ने शवों की पहचान की।  वहीं, भारी बारिश की वजह से सुनामी में जिंदा बचे लोगों की तलाश और शवों की बरामदगी में मुश्किल पैदा हो रही है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बोर्ड (बीएनपीबी) के अनुसार मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है, क्योंकि राहत और बचाव टीमें पानी में अभी भी शवों की तलाश कर रही हैं।

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गौरतलब है कि इंडोनेशिया में क्राकाटोआ ज्वालामुखी ने पिछले 135 सालों में दूसरी बार इतनी भयानक तबाही मचाई है। इससे पहले सन् 1883 में इस ज्वालामुखी की वजह से भारी जान-माल का नुकसान हुआ था। तब यहां 41 मीटर उंची सुनामी आई थी और तकरीबन 30,000 लोगों की मौत हुई थी। क्राकाटोआ ज्वालामुखी की वजह से 1883 में इतना भयानक विस्फोट हुआ था कि इसकी ताकत दूसरे विश्व युद्ध के समय जापान के हिरोशिमा शहर पर गिराए गए परमाणु बम से 13,000 गुना अधिक थी।

 

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