देश के बड़े बैंकों को 5643 करोड़ का घाटा,आरबीआइ के नए नियम बैंकों पर पड़े भारी

5643 crores of losses to the major banks of the country, the new rules of RBI are heavy on banks

आरबीआइ के नए नियम से बैंकों को कितना फायदा होगा, यह तो बाद में पता चलेगा। लेकिन अभी ये नियम सरकारी बैंकों के वित्तीय नतीजों को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के दो बड़े बैंकों को 5643 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।  इलाहाबाद बैंक (allahabad bank) को नॉन परफारमिंग असेट (NPA) के प्रावधान में तीन गुना इजाफा करने से 31 मार्च 2018 को समाप्त तिमाही में एकल आधार पर 3,509.63 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

फंसे कर्ज (एनपीए) की समय रहते पहचान करने और उसके लिए वित्तीय समायोजन करने संबंधी नए नियम से सरकारी बैंकों को बहुत बड़ी राशि अपने मुनाफे से अलग करनी पड़ रही है। लिहाजा इन बैंकों को घाटा हो रहा है। गुरुवार और शुक्रवार को सार्वजनिक क्षेत्र के देना बैंक, यूनियन बैंक और केनरा बैंक के वित्तीय नतीजे सामने आए हैं, और एनपीए के नए नियमों के चलते तीनों ही बैंकों को भारी घाटा हुआ है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले वित्त वर्ष की चौथी और आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च, 2018) में 2,583 करोड़ रुपये का घाटा उठाया है। उससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक को 108 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। यह इसलिए हुआ क्योंकि बैंक को समीक्षाधीन तिमाही में एनपीए के मद में 5,667.92 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान करना पड़ा। उससे पिछले वर्ष की समान अवधि में बैंक को इस मद में 2,444.12 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ा था। पिछले पूरे वित्त वर्ष (2017-18) में बैंक को 5,212.47 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

वहीं यूको बैंक का शुद्ध घाटा 31 मार्च 2018 को समाप्त तिमाही में चार गुना बढ़कर 2,134.36 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2016-17 की समान तिमाही में उसे 588.19 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। पिछले वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में भी उसे 116.43 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। बैंक ने कहा कि आलोच्य तिमाही के दौरान उसकी आय 3,906.74 करोड़ रुपये से गिरकर 3,424.65 करोड़ रुपये पर आ गई। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान बैंक का घाटा 1,850.67 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,436.37 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान आय 18,440.29 करोड़ रुपये से कम होकर 15,141.13 करोड़ रुपये पर आ गई। बैंक ने कहा कि निदेशक मंडल ने कोई लाभांश नहीं देने की सिफारिश की है। आलोच्य तिमाही के दौरान बैंक का एनपीए 17.12 प्रतिशत से बढ़कर 24.64 प्रतिशत हो गया। शुद्ध एनपीए भी 8.94 प्रतिशत से बढ़कर 13.10 प्रतिशत पर पहुंच गया।

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क्या होता है नॉन परफॉर्मिंग एसेट?
जब कोई देनदार अपने बैंक को ईएमआई देने में नाकाम रहता है, तब उसका लोन अकाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) कहलाता है। नियमों के हिसाब से जब किसी लोन की ईएमआई, प्रिंसिपल या इंटरेस्ट ड्यू डेट के 90 दिन के भीतर नहीं आती है तो उसे एनपीए में डाल दिया जाता है। इसे ऐसे भी लिया जा सकता है कि जब किसी लोन से बैंक को रिटर्न मिलना बंद हो जाता है तब वह उसके लिए एनपीए या बैड लोन हो जाता है। लोन के कई क्लासिफिकेशन हैं- स्टैंडर्ड, सब-स्टैंडर्ड, डाउटफुल और लॉस एसेट। लोन पर डिफॉल्ट के चलते बैंकों पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़े, इसके लिए आरबीआई ने उसके लिए प्रोविजन करने का नियम बनाया है। बैंक को प्रोविजन के बराबर की रकम बिजनेस से अलग रखनी पड़ती है।

 

 

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