सबरीमाला में टूटी 800 साल की परम्परा,40 साल की दो महिलाओं ने किए दर्शन

A tradition of broken 800 years in Sabarimala,

केरल के सबरीमाला मंदिर का इतिहास टूट गया है।सबरीमाला मंदिर में 50 साल से कम उम्र की दो महिलाओं ने प्रवेश कर 800 साल पुरानी प्रथा का अंत करते हुए इतिहास बनाया है। बता दें कि 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर मंदिर की ओर से बैन है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया थ। मगर इसके बाद भी मंदिर ने यह बैन बरकरार रखा। हालांकि, बुधवार को पुलिस सूत्रों ने कहा कि 50 साल से कम उम्र की दो महिलाओं ने मंदिर में एंट्री ली है।

बताया जा रहा है कि पेशे से वकील बिंदु और सामाजिक कार्यकर्त्ता कनकदुर्गा ने सादे कपड़ों में मंदिर में प्रवेश करके दर्शन किया। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान दर्जन भर पुलिस कर्मी भी सिविल ड्रेस में उनके साथ मौजूद रहे। महिलाओं के दर्शन के बाद मंदिर के शुद्धिकरण करने की खबरें हैं। बताया जा रहा है कि मंदिर शुद्धिकरण प्रक्रिया के लिए कुछ देर बंद रहा और अब इसे वापस दर्शन-पूजन के लिए खोल दिया गया है। बता दें कि बिंदू कॉलेज में लेक्चरर और भाकपा (माले) कार्यकर्ता हैं। वह कोझिकोड जिले के कोयिलैंडी की रहने वाली है। कनकदुर्गा मलप्पुरम के अंगदीपुरम में एक नागरिक आपूर्ति कर्मी हैं। वे दोनों 24 दिसंबर को सबरीमला आई थीं। रिपोर्ट की मानें तो दोनों महिलाएं एम्बुलेंस में मंदिर तक पहुंची। दोनों महिलाओं के दर्शन के लिए पुलिस ने पहले से इंतजाम किये हुए थे। पुलिस ने दोनों के दर्शन का वीडियो भी जारी किया है। प्रदेशभर में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने महिला श्रद्धालुओं को पूरी सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट से सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलने के लगभग तीन महीने बाद पहली बार महिलाओं ने सबरीमाला में भगवान अयप्पा के दर्शन किए।
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बता दें कि इससे पहले 24 दिसंबर के आस-पास भी सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शन की चाह रखने वाली तमिलनाडु की 11 महिलाओं के एक समूह को प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने पर यात्रा को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इस दौरान पुलिस ने दो दर्जन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।महिलाओं के इस समूह का नेतृत्व साल्वी कर रही थीं, जिनका संबंध तमिलनाडु के मनिति महिला समूह से है। भक्तों द्वारा पहाड़ी पर चढ़ने से उन्हें रोकने और भगाने पर इन महिलाओं को पंबा से मदुरै के लिए वापस जाने को बाध्य होना पड़ा।

 

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