ट्रम्प का जर्मनी पर हमला ,कहा-आप रूस के बंधक, अरबों डॉलर देकर बना रहे उसे अमीर

After the tragedy at the G-7 meeting, US President Donald Trump has attacked

जी-7 बैठक में हंगामे के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो बैठक से पहले जर्मनी पर हमला बोला है। ट्रंप ने जर्मनी पर ‘रूस का बंदी’ होने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने कहा है कि जर्मनी ने रूस के साथ पाइपलाइन डील की है जिससे रूस के खजाने में करोड़ों डॉलर्स जमा हो रहे हैं और जर्मनी की रक्षा करने में अमेरिका लगा हुआ है। साथ ही ट्रंप ने नाटो सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों से रक्षा व्यय को दोगुना करने का वादा करने की मांग कर सहयोगियों को सकते में डाल दिया।

बता दे की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार शाम ब्रसेल्स में नाटो नेताओं की बैठक में जर्मनी के खिलाफ खुलकर बयान दिए। ट्रम्प ने कहा, ‘‘एक तरफ हम आपकी रूस से और बाकी देशों से हिफाजत करते हैं, दूसरी तरफ आप रूस से अरबों डॉलर की डील कर लेते हैं। आप तो रूस को अमीर बना रहे हैं। जर्मनी पूरी तरह से रूस के नियंत्रण में है। रूस ने जर्मनी को बंधक बना रखा है। ये ठीक नहीं है।’’ ट्रम्प ने जब यह टिप्पणी की, उस वक्त जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल मौजूद नहीं थीं। इसके साथ ही ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों से आश्चर्यजनक मांग रखी है। जिसमे उन्होंने कहा है की अभी देश वादा करेंगे की आप रक्षा व्यय दोगुना करेंगे। यूरोप और अमेरिका के आरोप-प्रत्यारोप के कारण ब्रसेल्स का यह दो दिन का सम्मेलन ग‍ठबंधन के लिए सबसे मुश्किल समय साबित हो रहा है। बता दे की इससे पहले जर्मनी के फ्रेंकफर्ट में जी-7 देशों की समिट हुई थी। उसमें जर्मनी, फ्रांस, कनाडा अमेरिका के विरोध में दिखे तो ट्रम्प जी-7 सम्मेलन बीच में छोड़कर चले गए थे।
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यह है नाटो और ऐसे होती है फंडिंग
नॉर्थ ऐटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO), के 29 सदस्य हैं। इस संगठन को 1949 में सोवियत संघ को किसी भी तरह रोकने के उद्देश्य से किया गया था। इसका मुख्यालय ब्रसेल्स (बेल्जियम) में है। सोवियत संघ के विघटन के बाद भी इसे खत्म नहीं किया गया बल्कि इसकी भूमिका बदल दी गई। अब यह संगठन आतंकवाद से लड़ाई, पड़ोसी देशों में स्थिरता बनाए रखना, साइबर सुरक्षा वगैरह के लिए काम करता है। नाटो के सभी 29 सदस्यों को अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत रक्षा क्षेत्र के लिए देना होता है। हालांकि, इतना पैसा न देने वाले देशों के लिए किसी तरह के दंड या जुर्माने का कोई प्रावधान नहीं है। अमेरिका मौजूदा समय में नाटो के कुल खर्च का 22 प्रतिशत देता है। साल 2017 में अमेरिका ने नाटो के लिए 2 अरब डॉलर यानी 137 अरब रुपये से ज्यादा खर्च किया है।

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