सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली को बताया आला दर्जे का झूठा ग्रुप, कहा कुर्क करे सारे होटल-मॉल-फैक्ट्री

सुप्रीम कोर्ट ने संकट में फंसे आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ मामले में बुधवार को सख्त टिप्पणी करते हुए रीयल्टी क्षेत्र की इस कंपनी के पांच-सितारा होटल, सिनेमा हॉल, मॉल और देशभर में स्थित कारखानों को कुर्क करने और उनकी बिक्री करने के आदेश दिए। कोर्ट ने अपने आदेश का अनुपालन न करने को लेकर आम्रपाली समूह को ‘बहेद घटिया धोखेबाज’ और ‘पक्का झूठ बोलने वाला’ कहा।

बता दें कि आम्रपाली ग्रुप पर 42 हजार खरीदारों को वक्त पर घर का पजेशन न दे पाने का आरोप है। खरीदारों ने घर मिलने में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने ग्रुप से कहा- आप साफ झूठ बोलने वाले और दुनिया के सबसे बदतर किरदार हैं।  पीठ ने कहा कि फ्लैट खरीदारों से ली गई रकम से जो भी संपत्ति बनाई या खरीदी गई है, उसे बेचा जाएगा। समूह के निदेशकों ने जो हलफनामा दिया है, उसमें 2996 करोड़ रुपये दूसरी जगह डायवर्ट करने की बात सामने आई है। हलफनामे के मुताबिक, फ्लैट खरीदारों से ली गई रकम से राजगीर, बक्सर व ग्रेटर नोएडा में होटल, बरेली में मॉल और नोएडा में ऑफिस खरीदे गए हैं। कोर्ट ने इसके साथ ही कंपनी निदेशकों को नोटिस देकर पूछा कि क्यों न उन पर ठगी और अमानत (आईपीसी धारा 406, 415) में खयानत करने का आपराधिक मामला चलाया जाए। निदेशकों को इसका जवाब बुधवार तक देना है। कोर्ट यह काम तत्काल करना चाहता था लेकिन निदेशकों ने कहा कि आपराधिक मुकदमे में आने से उनकी संपत्तियों का भाव गिर जाएगा।

बेंच ने कहा- आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। ये प्रमोटरों का पैसा नहीं था। अगर उन्होंने कंपनी में पैसा लगाया होता तो बात समझ में आती। लेकिन, घर खरीदारों का पैसा शेयर खरीदने में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। कोर्ट ने ग्रुप के निदेशकों और उनके परिवारवालों को एक मौका देते हुए कहा कि अगर आपके पास खरीदारों का पैसा है, तो उसे 10 दिसंबर तक लौटा दें। यह भी बताएं कि खरीदारों के 3 हजार करोड़ रुपए दूसरे मकसद के लिए डायवर्ट क्यों किए गए?सुनवाई के दौरान फॉरेंसिक ऑडिटरों ने बताया कि कंपनी ने अपने ही शेयर 11 सौ करोड़ रुपये में खरीद रखे हैं। यह अजीब है क्योंकि कंपनी खुद अपने शेयर नहीं खरीद सकती। यह अपने आप में नया घोटाला है। कोर्ट निदेशकों की तमाम आलीशान कारें भी जब्त करना चाहता था लेकिन उसने कहा कि इसे बाद में देखा जाएगा।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के वकील रवींद्र कुमार से पूछा कि ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली द्वारा सबलीज की किए गए पांच में से तीन प्लॉटों की क्या स्थिति है। इस पर रवींद्र ने बताया कि बिल्डर पर इन संपत्तियों का 3000 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें भूमि की कीमत, उस पर देय ब्याज और मुआवजे का 64 फीसदी हिस्सा देना शामिल है। कोर्ट ने इस बात का संज्ञान लिया और कहा कि इस बारे में अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।गौरतलब है कि कोर्ट ने पिछले दिनों आम्रपाली समूह के निदेशेकों को पुलिस हिरासत में भेज दिया था। ये लोग दो दिन पुलिस की हिरासत में रहे। इस दौरान उन्होंने कंपनी के विभिन्न ठिकानों से फॉरेंसिक ऑडिटरों को कागजात मुहैया करवाए। निदेशक ये कागजात ऑडिटरों को नहीं दे रहे थे। इस ऑडिट में ही बताया गया था कि आम्रपाली ने फ्लैट और प्लॉट के खरीदारों से 2400 करोड़ रुपये एकत्र किए और उनका कहीं और निवेश कर दिया।

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