अल्मोड़ा के नन्हें-नन्हें बच्चों ने बनाई समाज की सच्चाई को बयां करती दिल को छू जाने वाली कॉमिक

कॉमिक एक माध्यम है जहाँ विचारों को व्यक्त करने के लिए सामान्य पाठ्यक्रम के अपेक्षा चित्रों, एवं बहुधा शब्दों के मिश्रण तथा अन्य चित्रित सूचनाओं की सहायता से पढ़ा जाता है। काॅमिक्सों में निरंतर किसी भी विशिष्ट भंगिमाओं एवं दृश्यों को चित्रों के पैनल द्वारा जाहिर किया जाता है कविताएं और कहानियां हमे आज भी अच्छी लगती है। इसी क्रम में अल्मोड़ा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला धौलादेवी के नन्हे -नन्हे मासूम बच्चे अपनी कॉमिक स्वयं बनाते है।

बच्चों की कल्पना शक्ति दिल को छू लेती है। जो समाज की सत्यता को दर्शाती है। इन कॉमिक्स को पढ़ कर आप बच्चो का मूल्यांकन कर पाएंगे,उन्हें बिना देखे उनके परिवेश और लर्निंग एनवायरनमेंट के बारे मे जान पाएंगे। जरा सोचिए ऐसा क्या है कॉमिक में की इस अवस्था मे भी हमे वे अपनी ओर आकर्षित करती है , हम अपने आप को कविता और कहानियों से जोड़ लेते है और अंत तक जुड़े ही रहते है, कहीं न कहीं यह मान लेते है कि अमुक पात्र तो मेरे जैसा ही है या ये कहानी तो बिल्कुल मेरी ही है, ये कविता तो दिल को छु गयी…..

यही भावना बाल मन में भी होती है,बस वे अपनी भावनाओं को व्यक्त नही कर पाते , बता नही पाते की उनके अंदर क्या उथल पुथल चल रही है ,कहाँ पर अवरोध है, वैसे तो ढेरों बाल साहित्य है हमारे पास पर उन बाल साहित्यों मे परिवेशीय छुवन न के बराबर होती है बालक की कल्पना को वो आयाम नही मिल पाता जिसकी हमे अधिगम को स्थाई और परिपक्व करने हेतु आवश्यकता होती है।

इसी सोच को लेकर राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला में अध्यापक बच्चो से खुद की कहानियां लिखने को कहा और जिसमें बच्चों को कम से कम शब्दों का प्रयोग ,ज्यादा चित्र और पूरी कहानी का नियम दिया गया। इस प्रकार स्कूल की कॉमिक का निर्माण हुआ ,बच्चे अपने जहन मे दबी हुई बाते तक अब बेहिचक लिखते है। जिसके तहत विद्यार्थी मनीष ने मंदिर मे चोरी, पंकज ने शराबी बेटा,राहुल ने गरीब परिवार, नेहा ने चोरी का फल, सुनीता ने सच्चाई वाला विषय पर कॉमिक रचना की।

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विघालय के अध्यापक भास्कर जोशी बताते है कि कॉमिक से भाषागत विक्षमताये कम हो रही है, बालक का मूल्यांकन लगातार उसी के द्वारा किये गए कार्य के आधार पर हो रहा है। बच्चे अब हमारे मित्र की भूमिका मे है। बच्चों का विश्वाश बढ़ रहा है। यही तो भाषा का मुख्य उद्देश्य है कि हम अपनी बात प्रभावी तरह से रख पाए, प्रस्तुत शून्य नवाचर प्राथमिक स्तर के छात्रों की अधिगम क्षमता, उनकी रूचि, को तो बढ़ा ही रहा है साथ साथ यह अध्यापक और बच्चो मे एक न टूटने वाले बंध का निर्माण भी कर रहा है।

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