बसंत पंचमी: माँ सरस्वती की उपासना से सारे मनोरथ होंगे पूर्ण

बसंत पंचमी: इस शुभ मुहूर्त में करें मां सरस्वती की उपासना, सारे मनोरथ होंगे पूर्ण

नई दिल्ली। हिन्दू धर्म के लोगों के लिए बसंत पंचमी का खास महत्व है। बसन्त पंचमी को बसन्त ऋतु का आगाज भी माना जाता है।यह माघ शुक्ल पंचमी पर गुप्त नवरात्र के अंतर्गत वसंत पंचमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा का विधान है। इस दिन से वसंत ऋतु का आगमन मानते हैं जिसमें विष्णु व कामदेव का पूजन किया जाता है।

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विशेष पूजन विधि
घर की उत्तर दिशा में पीला वस्त्र बिछाकर सरस्वती का चित्र स्थापित पर उसका विधिवत पूजन करें। हल्दी मिले गौघृत का दीप करें, सुगंधित धूप करें, पीले कनेर के फूल चढ़ाएं, पीत चंदन से तिलक करें, बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इस विशेष मंत्र को 108 बार जपें। इसके बाद भोग किसी गरीब को बांट दें।

 मंत्र:

ऐं सरस्वत्यै नमः॥

पौराणिक मतानुसार ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़क कर चतुर्भुजी सुंदर स्त्री को प्रकट किया था, जिसके हाथ में वीणा, वर मुद्रा, पुस्तक व माला थी। जिनकी वीणा के मधुरनाद से संसार के समस्त जीवों को वाणी प्राप्त हुई। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, शारदा, वीणावादनी व वाग्देवी के नामों से पूजा जाता है। ये विद्या व बुद्धि प्रदाता हैं। विष्णु-धर्मोत्तर पुराण में वाग्देवी को आभूषणों से युक्त चतुर्भुजी कहा है। स्कंद पुराण में सरस्वती जटा-जुटयुक्त, अर्धचन्द्र मस्तक पर धारण किए, कमलासन पर सुशोभित, नील ग्रीवा वाली त्रीनेत्री हैं। सरस्वती ने अपने चातुर्य से देवों को राक्षसराज कुंभकर्ण से बचाया था। संगीत की देवी सरस्वती का जन्मोत्सव वसंत पंचमी पर मनाया जाता है। वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती के विशेष पूजन से कटु वाणी से मुक्ति मिलती है, अध्ययन में सफलता मिलती है व असाध्य कार्य पूरे होते हैं।

 

 

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