गुजरात में सामने आया PNB से भी बड़ा घोटाला, निवेशकों के 3 अरब डॉलर डूबे

 Bigger scam than PNB emerged in Gujarat, $ 3 billion of investors submerged

भारत का सबसे बड़ा घोटाला कहे जाने PNB महाघोटाले से भी बड़ा घोटाला गुजरात से सामने आया है। जिसमें निवेशकों के करीब 3 अरब डॉलर डूब गए। बताया जा रहा है कि यह घोटाला गुजरात के सूरत में बिटक्‍वाइन आधारित पोंजी स्‍कीम से जुड़ा है। इसे बैंकिंग जगत का सबसे बड़ा घोटाला कहा जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सूरत देश के हीरा उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है और इस घोटाले का भी रहा, जहां से पोंजी स्‍कीम शुरू हुई। यह घोटाला पीएनबी के महाघोटाले से कहीं बड़ा है। इसमें सूरत से लेकर टेक्‍सास (अमेरिका) तक लोगों ने निवेश किया। बताया जा रहा है कि घोटालें में प्रॉपर्टी डीलर, हीरा व्‍यवसायी और गुजरात के कुछ बड़े नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्‍होंने नोटबंदी के दौरान इस पोंजी स्‍कीम में करोड़ों रुपए का काला धन लगाया था। कहा जा रहा है करीब 3 अरब डॉलर (2 खरब रुपये) मूल्य के बिटकॉइन क्राइम की जांच में जो बातें सामने आ रही हैं, वो एक फिल्मी कहानी की तरह है।
दरअसल घोटाले की जांच एक प्रॉपर्टी डीलर शैलेश भट्ट की शिकायत पर हुई। फरवरी महीने में प्रॉपर्टी डिवेलपर शैलेश भट्ट गुजरात के गृह मंत्री के दफ्तर पहुंचे। वहां उन्होंने दावा किया कि गुजरात पुलिस ने उनका अपहरण कर लिया था और फिरौती में 200 बिटकॉइन मांगे थे जिसकी कीमत करीब 1.8 अरब रुपये (अब करीब 9 करोड़ रुपये) है। सीआईडी ने मामले की जांच शुरू की और 8 पुलिसवालों की मिलीभगत का खुलासा हुआ। यह भी पता चला कि भट्ट को अगवा करने की साजिश उसके सहयोगी किरिट पलाडिया ने रची थी। इस वारदात का सूत्रधार पलाडिया का चाचा नलिन कोटाडिया था। कोटाडिया बीजेपी का पूर्व विधायक रहा है। जांच में संदेह की उंगली खुद पीड़ित शैलेश भट्ट पर की तरफ भी उठ रही है। पलडिया अभी जेल में है, लेकिन भट्ट और पूर्व विधायक कोटडिया भागे हुए हैं। अप्रैल में कोटडिया ने वॉट्सऐप पर विडियो भेजकर खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने इस बिटकॉइन घोटाले के पीछे खुद शैलेश भट्ट का हाथ होने का दावा किया। कोटडिया ने धमकी दी कि वह ऐसे सबूत दे देंगे जिससे अन्य नेता भी फंस सकते हैं।

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रिपोर्ट के अनुसार 2016 से 2017 के बीच शैलेश भट्ट ने बिटकनेक्ट नाम की एक क्रिप्टोकरंसी कंपनी में निवेश किया। यह कंपनी किसी सतीश कुंभानी ने बनाई थी। यह एक पोंजी स्कीम थी जिसमें दुनियाभर के निवेशकों को बिटकनेक्ट में अपने-अपने बिटकॉइन जमा कराने को कहा गया जिस पर 40% ब्याज देने का वादा किया। कंपनी बिटकॉइन जमा करानेवालों को बिटकनेक्ट कॉइन्स दिया करती थी। साथ ही कहा गया कि जो व्यक्ति जितना ज्यादा निवेशक लाएगा, उसकी ब्याज दर उसी अनुपात में बढ़ती जाएगी। बिटकनेक्ट में 3 अरब डॉलर (करीब 2 खरब रुपये) मूल्य के बिटकॉइन्स जमा किए जा चुके थे। बता दें कि मोदी सरकार के नोटबंदी के हैरतअंगेज फैसले ने कालेधन वालों में घबराहट पैदा कर दी और वे अपनी संपत्ति सफेद करने में जुट गए। नोटबंदी के बाद कालेधन को सफेद करने के तरीके को लेकर गूगल सर्च में बढ़ोतरी देखी गई। इन सवालों का एक जवाब यह भी होता था कि क्रिप्टोकरंसी में निवेश कर दिया जाए।

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