बच्चों की गवाही से पिता को उम्रकैद !

19 अप्रैल 2016 के दिन रायपुर क्षेत्र की घटना है। जिसमें सुधीर तिवारी (45) जो राजकीय इंटर कालेज में शिक्षक था। और रायपुर में कृष्णा विहार के लेन नंबर पांच मकान नंबर 115 में पत्नी मीनाक्षी (40) व बेटे अनिरुद्ध व बेटी निकिता के साथ रहता था। उसकी पत्नी मीनाक्षी भी प्राथमिक विद्यालय हडेलीघाट, जौनपुर, टिहरी गढ़वाल में शिक्षिक थी।
इस घटना से तीन दिन पहले सुधीर बेटी को परीक्षा दिलाने दिल्ली गया था। 19 अप्रैल 2016 की रात करीब आठ बज दिल्ली से लौट कर पहुंचे सुधीर ने पत्नी से पीने के लिए एक गिलास पानी मांगा, लेकिन उसने इनकार कर दिया, इस पर दोनों में झगड़ा होने लगा।
इस बीच सुधीर ने किचन से चाकू लेकर आया और उसने मीनाक्षी पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। लहूलुहान मीनाक्षी जमीन पर जमीन पर गिर पड़ी। उस समय अनिरुद्ध वहीं था, जबकि बेटी निकिता बाथरूम में थी। शोर सुनकर वह बाहर निकली।
बच्चों अनिरुद्ध और निकिता ने मां को बचाने की भी कोशिश करते हुये शोर मचाया था। जब आसपास के लोग एकत्रित हुये थेे, तब तक सुधीर ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। थोड़ी देर बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने सुधीर को कमरे से बाहर निकाला तो वह भी लहुलुहान था और उसके मुंह से फिनायल की बू आ रही थी। पुलिस एंबुलेंस से दोनों को लेकर दून मेडिकल कालेज पहुंची, जहां मीनाक्षी को मृत घोषित कर दिया गया। सुधीर तीन-चार दिन के उपचार के बाद ठीक हो गया तो रायपुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सुधीर के खिलाफ आइपीसी की धारा 302 (हत्या) व 309 (आत्महत्या का प्रयास) का नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। तभी से वह जेल में था।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने अभियुक्त को हत्या में उम्रकैद व पांच हजार रुपये के अर्थदंड व आत्महत्या के प्रयास में छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।
इस केस के मुख्य गवाह दोनों बच्चे जिन्होंने तीन साल पहले अपनी आंखों के सामने मां का कत्ल देखा अनिरुद्ध और निकिता आज भी वह खौफनाक मंजर नहीं भूले हैं। जहां एकतरफ उन्हें मां को खोने का गम सालता है, वहीं कातिल पिता को लेकर उनके दिल में अब भी गुस्सा कायम है।
वह इस हद तक कि कोर्ट में मौजूद होने के बावजूद उन्होंने अभियुक्त पिता ने नजरें भी नहीं मिलाई। जिस वक्त अदालत उनके पिता सुधीर को सजा सुना रही थी, तब दोनों अदालत परिसर में मौजूद थे, लेकिन कोर्ट रूम तक इसलिए नहीं आए कि कहीं उन्हें पिता की शक्ल न दिख जाए।
तीन साल पहले तक अन्य बच्चों की तरह अनिरुद्ध और निकिता की जिंदगी मां मीनाक्षी की ममता और पिता सुधीर तिवारी के प्यार में हंसी-खुशी आगे बढ़ रही थी। तब उन्होंने सपने में भी यह नहीं सोचा होगा कि घर में आए दिन होने वाला क्लेश एक दिन न सिर्फ उनसे उनकी मां को दूर कर देगा, बल्कि पिता का सहारा भी छीन लेगा।
इन दोनों के ही सामने सुधीर तिवारी ने खूनी खेल खेला था। जब उसने पत्नी मीनाक्षी पर चाकू से हमला किया तो उस वक्त दोनों घर पर ही थे। दोनों पिता से मां पर रहम की भीख मांगते रहे, लेकिन सुधीर पर तब खून सवार था। बच्चों की चीख-पुकार और रोने-बिलखने का भी उस पर कोई असर नहीं हुआ। मां को खून से लथपथ तड़पता देख पिता के प्रति मन में जो प्यार था वह नफरत में बदल गया।
दोनों के शोर मचाने के कुछ देर बाद जब पुलिस पहुंची तो दोनों पिता की करतूत पुलिस को बताने में जरा भी नहीं हिचकिचाए। समय बीता और अदालत ने सजा का एलान भी कर दिया, लेकिन इन तीन वर्षों में दोनों के मन में पिता के प्रति खाई बढ़ती गई। यही वजह रही कि अनिरुद्ध और निकिता सजा सुनाए जाने के वक्त कचहरी में मौजूद तो थे, लेकिन अदालत में नहीं गए। दोनों ही नहीं चाहते थे कि उनका उस पिता से आमना-सामना हो, जिसने उनकी मां को उनसे हमेशा-हमेशा के लिए दूर कर दिया।
अनिरुद्ध और निकिता ने हत्या के वक्त पुलिस को जो बयान दिया था, वही सब उन्होंने मजिस्ट्रेट के समक्ष भी दोहराया। वहीं अदालत में जब उनकी गवाही हुई तो भी दोनों अपने पूर्व के बयानों पर कायम रहे। उम्रकैद की सजा दिलाने में दोनों की गवाही अहम साबित हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए थे, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक भी गवाह सामने नहीं आया।
पिता को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने की जानकारी मिलते ही अनिरुद्ध और निकिता की आंखें डबडबा आईं। इस दौरान साथ में मौजूद उनकी मौसी ने दोनों को संभाला और अपने साथ घर ले गईं।

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