नागरिकता कानून पर देश के तमाम हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन

असम में पांच लड़के गोली से मारे गए। कई घायल हैं। कश्मीर के बाद नॉर्थ ईस्ट और अब पूरा देश। इस सरकार की यही मंशा है कि फोन, इंटरनेट बंद कर दो टीवी बंद कर दो अखबार में कोई खबर न आए ये कहना है विपक्ष का |

वहीं देश के तमाम हिस्सों में नागरिकता कानून पर संग्राम मचा हुआ है। असम बंगाल दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। आज इसे लेकर दिल्ली के सीलमपुर में बवाल मचा। यहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और कई बसों.गाड़ियों को फूंक दिया।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया हिंसा और नागरिकता कानून को लेकर विपक्ष ने आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई। विपक्ष की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया ने की। विपक्ष ने राष्ट्रपति से छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग की साथ ही कानून वापस लेने मांग की|

मुलाकात के बाद सोनिया ने कहा हमने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वह मौजूदा हालात को देखते हुए इसमें दखल दें। हमने दिल्ली में देखा कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर किस तरह कार्रवाई की। हम इसकी निंदा करते हैं। आप सभी ने देखा कि जब लोगों की आवाज दबाने की बात आती है तो मोदी सरकार पीछे नहीं रहती।

सीपीएम के सीताराम येचुरी ने कहा कि हमने कहा कि वह इस सरकार को संविधान का उल्लंघन करते नहीं देख सकते। हमें इसकी चिंता है। राष्ट्रपति सरकार को इस कानून को वापस लेने की सलाह दें।

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा ये कानून देश को बांटने वाला कानून है। उनकी संख्या संसद में ज्यादा है इसलिए उन्होंने लोगों और देश की कोई परवाह नहीं की। विपक्ष को पता था कि देशवासी इस कानून को नकार देंगे। शायद ही कोई राज्य और शिक्षण संस्थान है जहां लोग सड़कों पर न उतरे हों। छात्रों पर बेदर्दी से लाठीचार्ज हो रहा है।