दिल्ली: रातोंरात ऐतिहासिक मकबरे को मंदिर में बदलने पर विवाद, केजरीवाल सरकार ने मांगी रिपोर्ट

Delhi: A dispute over changing the historic tomb in the temple overnight,

दक्षिणी दिल्ली में एक मकबरे को मंदिर में बदल देने का मामला सामने आया है। हुमायूंपुर के 650 साल पुराने ऐतिहासिक मकबरे में मूर्तियों को रखकर इसे मंदिर का रूप दे दिया गया।  ‘गुमटी’ नाम का यह मकबरा दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव स्थित हुमायूंपुर गांव में स्थित है। रिहाइशी इमारतों और पार्क के बीच बने इस मकबरे को राज्य सरकार ने स्मारक का दर्जा दिया है। दो महीने पहले खामोशी से मकबरे को रातोंरात शिव भोला मंदिर में तब्दील हो गया।

इस मामले में दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट तलब की है। उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने संस्कृति एवं भाषा विभाग (एसीएल) की सचिव को आज रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिये हैं। उप मुख्यमंत्री ने सचिव को दिए अपने आदेश में कहा, ”धरोहर संपत्ति को नुकसान पहुंचाना कानून के खिलाफ है और एक गंभीर अपराध है। सचिव ( एसीएल ) घटना के ब्योरे और उनके द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।”

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जानकारी के अनुसार मकबरे को मार्च महीने में इसे सफेद और भगवा रंग से रंग दिया गया और अंदर मूर्तियां रख दी गईं। पता चला है कि ऐसा करना पुरातत्व विभाग के सिटिजन चार्टर का पूरी तरह उल्लंघन है। इसमें साफ लिखा है कि किसी स्मारक के अंदर या बाहर, दीवार को पेंट या वाइटवॉश नहीं किया जा सकता। यह भी कहा गया है कि ऐतिहासिक महत्व वाले इन स्मारकों की मौलिकता को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।स्थानीय लोग के अनुसार करीब दो महीने पहले ये खंडहर मात्र था और इस गुम्बद में भोला नाम के एक पंडित रहते थे। उनकी मृत्यु के बाद से इसे भोला का मंदिर कहा जाने लगा था। वहीं गांव के कुछ लोगों का ये भी कहना है कि ये कभी मंदिर था ही नहीं। गांव के कुछ लोग कहते हैं कि वो लोग करीब 80 साल से इसी गांव में रहते हैं। उनका कहना है कि मंदिर बनाने के लिए गुम्बद के अंदर की कब्र को तोड़ा गया। इस गुम्बद को स्टेट अर्बन डेवलपमेंट के 2010 के नोटिफिकेशन में 767 ऐतिहासिक इमारतों में शामिल किया गया है। वहीं इस मामले में दिल्ली सरकार ने सख्त रवैया अपनाया है और ऐतिहासिक इमारत को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई एक्शन लेने की बात भी कही है।

 

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