ISI के लिए जासूसी करती थी पूर्व राजनयिक माधुरी , दिल्ली कोर्ट ने ठहराया दोषी

Former diplomat Madhuri, Delhi court adjourned for ISI spy

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को गोपनीय सूचना देने व देश की सुरक्षा से समझौता करने के मामले में दिल्ली की पटिलाया हाउस कोर्ट ने पूर्व डिप्लोमैट माधुरी गुप्ता दोषी करार दिया है। माधुरी की गिरफ्तारी के 10 साल बाद यह फैसला आया है, जिसमें माधुरी को अधिकतम 3 साल की सजा हो सकती है। बता दे की माधुरी गुप्ता पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रेस एवं सूचना सचिव थी। दिल्ली पुलिस ने उन्हें 2010 में गिरफ्तार किया था।

दरअसल दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने माधुरी गुप्ता को जासूसी करने व गोपनीय सूचनाएं आईएसआई को देने के मामले में भारतीय गोपनीयता अधिनियम की कई धाराओं में दोषी करार दिया था। माधुरी गुप्ता की सजा पर शनिवार को सुनवाई होगी। बताते चले की माधुरी पर गोपनीय जानकारी आईएसआई को देने व उसके दो अधिकारियों को मुबशर रजा राणा व जमशेद के संपर्क में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद 19 जुलाई 2010 को माधुरी गुप्ता के खिलाफ गोपनीयता अधिनियम समेत कई धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने चार्जशीट पर सुनवाई के बाद माधुरी गुप्ता के खिलाफ आपराधिक साजिश, विश्वासघात व गोपनीयता अधिनियम के तहत 12 नवंबर 2016 को आरोप तय किए थे।

स्पेशल सेल की पूछताछ में माधुरी ने कबूल किया
इससे पहले पुलिस की पूछताछ में माधुरी गुप्ता ने कई सनसनीखेज खुलासे किए थे। माधुरी ने बताया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत की सुरक्षा से संबंधित गुप्त जानकारी हासिल करना चाहती है और वह भारत और पाकिस्तान की हर गतिविधी पर नजर रखती है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की पूछताछ में माधुरी ने कबूल किया था कि आईएसआई एजेंट भारत-पाक वार्ता से जुड़ी जानकारी पूछा करता था। उन्होंने बताया था कि भारत-पाक वार्ता के भारतीय एजेंडे में एजेंट की खास दिलचस्पी थी। माधुरी गुप्ता ने कबूल किया था कि उनके द्वारा कई अहम जानकारियां आईएसआई के हाथ लगीं। माधुरी गुप्ता ने बताया था कि उनके सीनियर अधिकारी उनका अपमान करते थे और मजाक उड़ाते थे, इसी का फायदा उठाते हुए आईएसआई एजेंट राणा ने उससे नजदीकी बनानी शुरू की और प्यार का इजहार कर दिया।
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ऐसा था माधुरी का प्रारंभिक जीवन

माधुरी गुप्ता जेएनयू की छात्रा रह चुकी है। वहां उसने 2000 से 2005 तक मध्यकालीन भारतीय इतिहास की पढ़ाई की और उसी दौरान वह इस्लाम से बहुत ज्यादा प्रभावित हो गईं। उसे उस धर्म से बहुत लगाव हो गया। माधुरी की मां प्रिंसिपल और पिता शिक्षक थे। इससे पहले साल 1970 में उसने डीयू के एंथ्रोलॉजी विभाग से फॉरेंसिक साईंस, क्रिमोलॉजी और क्रिमिनल लॉ की पढ़ाई की थी। वर्ष 1970 में वह डीयू के एंथ्रोलॉजी विभाग से फोरेंसिक साईंस, क्रमोलॉजी व क्रिमिनल लॉ की पढ़ाई कर चुकी है। माधुरी ने 2003 से 2005 तक स्टडी लीव ली और जेएनयू में इतिहास से एम. फिल कराने के लिए एंरोल कराया। मध्यकालीन भारत में एम-फिल करने के दौरान ही उसे इस्लाम से इस कदर प्यार हो गया था कि वह इस्लाम धर्म की कई बातें मानने लगी थीं। पाक स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात होने के बाद वह उसकी पाक खुफिया विभाग केअधिकारी 60 वर्षीय राणा से हुई थी।

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