उत्तराखंड हाईप्रोफाइल लूटकांड: कांग्रेस नेता और तीन पुलिसकर्मी गए जेल, एक कॉल ने खोली पोल

उत्तराखंड में आइजी गढ़वाल की सरकारी गाड़ी में सवार होकर आचार संहिता के नाम पर प्रॉपर्टी डीलर से करीब एक करोड़ रुपए लूटने के आरोपीत पुलिसकर्मियों व साजिश में शामिल कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा को डालनवाला कोतवाली पुलिस ने बुधवार को कोर्ट में पेश किया।बता दें कि मामले में पहले पुलिस यही अनुमान लगा रही थी कि किसी गैंग ने पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम दिया है। लेकिन सिपाही मनोज अधिकारी की एक कॉल ने पूरी साजिश को तार-तार कर दिया है। जिसके बाद चारों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

जानकारी के अनुसार बीती चार अप्रैल की रात प्रॉपर्टी डीलर अनुरोध पंवार निवासी कैनाल रोड, बल्लूपुर को डब्ल्यूआइसी में अनुपम शर्मा ने प्रॉपर्टी से संबधित रकम लेने के लिए बुलाया। अनुरोध जब वहां से बैग लेकर लौट रहे थे तो रास्ते में होटल मधुबन के पास आईजी गढ़वाल सफेद रंग की स्कॉर्पियो में बैठे तीन लोगों ने ओवरटेक कर उन्हें रोक लिया। उनके रुकते ही स्कॉर्पियो से दो वर्दीधारी पुलिसकर्मी उतरे। चुनाव की चेकिंग के नाम पर उन्होंने कार की तलाशी ली और उसमें रखा बैग कब्जे में ले लिया। छह अप्रैल को अनुरोध ने दून पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने जांच शुरू की तो पाया कि स्कॉर्पियो आइजी गढ़वाल के नाम आवंटित है और उसमें बैठे दारोगा दिनेश नेगी, सिपाही हिमांशु उपाध्याय और मनोज अधिकारी ने वारदात को अंजाम दिया है।जिसके बाद दस अप्रैल को डालनवाला कोतवाली में लूट की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया, बाद में जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। वहीं मामले में कई सवाल सामने आ रहे है। सवाल उठ रहा है कि ये कैसी लूट है, जिसमें शिकायतकर्ता को रकम तक की जानकारी नहीं है।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा, रकम अभी भी लापता

गौरतलब है कि प्रापर्टी डीलर अनुरोध पंवार ने पुलिस को बताया था किआईजी गढ़वाल की गाड़ी में सवार पुलिसकर्मियों ने उन्हें अपने साथ बैठा लिया था। जिसके बाद वह उन्हें सर्वे चौक पर छोड़ कर चले गए थे। पुलिस ने चार अप्रैल की रात ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों से पूछताछ शुरू की तो स्थैतिक निगरानी टीम में शामिल होमगार्ड ने खुलासा किया कि उस रात कार में सवार एक सिपाही ने उसके मोबाइल से किसी को फोन किया था। इस इसी कॉल ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचा दिया। मंगलवार की रात चारों को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन रकम बरामद करने की असल चुनौती अभी बाकी है।
वहीं एसटीएफ की हिरासत में कांग्रेसी नेता अनुपम शर्मा ने बताया कि बैग में कोई रकम नहीं थी। शिकायतकर्ता अनुरोध पंवार से उनकी दिल्ली में मुलाकात हुई थी। इस दौरान उनका बैग छूट गया था। डब्लूआईसी क्लब से पंवार वही बैग लाए थे, जिसमें शराब की दो बोतलों के अलावा डाईफ्रूट और कपड़े रखे थे। बैग में कोई धनराशि नहीं थी। निलंबित दरोगा दिनेश नेगी ने कहा कि उन पर लगाया गया लूट का आरोप गलत  है। उनके पास से किसी तरह की बरामदगी भी नहीं हुई है।उस रात सड़क पर बस हंगामा हुआ था। जिसे वह स्वीकार कर चुके है।
इन धाराओं में हुआ मुकदमा दर्ज
आरोपितों पर आइपीसी की धारा 341 (किसी को गलत तरीके से रोकना, हिरासत में लेना), 365 (अपहरण) व 170 (सरकारी पद का दुरुपयोग), 392 (लूट) और 120बी (साजिश रचना) की धाराओं में मुकदमा दर्ज है। पुलिस कर्मियों ने लोकसेवक के पद पर रहते हुए अपराध किया है, जो नरमी बरतने के योग्य नहीं है। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने लूट और अपहरण की धारा लगाए जाने पर आपत्ति जताई, लेकिन कोर्ट ने प्रकरण को बेहद गंभीर बताते हुए सभी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।  घटनाक्रम को लेकर पूरे तकनीकी साक्ष्य मौजूद हैं, लेकिन अब लूट की रकम से पर्दा उठने का इंतजार है। रिमांड पर सुनवाई के लिए 30 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *