कैलाश में विराजते है भगवान शिव ,गूगल ने भी स्वीकारा !

गूगल ने भी स्वीकारा, कैलाश में विराजते है भगवान शिव

देहरादून। हिन्दू धर्म के लोग कैलाश मानसरोवर को शिव-पार्वती का घर माना जाता है। हर कोई यहां जाकर बाबा भोलेनाथ के निवास स्थान के दर्शन करना चाहता है। इस पवित्र पर्वत की हिन्दू धर्म के लोग पड़ी आस्था के साथ पूजा करते हैं। वहीं सदियों से देवता, दानव, योगी, मुनि और सिद्ध महात्मा यहां तपस्या करते आए हैं। वहीं भगवान धरती पर हैं, या नही इस बात को लेकर अभी तक यह बहस का व‌िषय ही रहा है। लेक‌िन जब यहां साक्षात भगवान श‌िव द‌िखाई द‌िए थे, तो नासा भी इससे हैरान रह गया था। भगवान श‌िव की सोशल मीड‌िया पर वायरल हो रही इन तस्वीरों को गूगल ने भी स्वीकार क‌िया था । तस्वीरों में कैलाश पर्वत पर भगवान श‌िव की परछाई  द‌िखाई दे रही थी। हैं। यह फोटो गूगल अर्थ से ली गई थी। हालांक‌ि यह वीड‌ियो कुछ साल पहले सामने आया था।

कैलाश पर इस तरह की परछाई द‌िखना श‌िवभक्तों के ल‌िए क‌िसी चमत्कार से कम नहीं है। भगवान शिव की आकृति को देख हर कोई हैरान रह गया। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति मानसरोवर (झील) की धरती को छू लेता है, वह ब्रह्मा के बनाये स्वर्ग में पहुंच जाता है और जो व्यक्ति झील का पानी पी लेता है, उसे भगवान शिव के बनाये स्वर्ग में जाने का अधिकार मिल जाता है। ये भी कहा जाता है कि ब्रह्मा ने अपने मन-मस्तिष्क से मानसरोवर बनाया है। दरअसल, मानसरोवर संस्कृत के मानस (मस्तिष्क) और सरोवर (झील) शब्द से बना है। मान्यता है कि ब्रह्ममुहुर्त (प्रात:काल 3-5 बजे) में देवता गण यहां स्नान करते हैं। ग्रंथों के अनुसार, सती का हाथ इसी स्थान पर गिरा था, जिससे यह झील तैयार हुई। इसे 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना गया है। गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर की बर्फ पिघलती है, तो एक प्रकार की आवाज भी सुनाई देती है। श्रद्धालु मानते हैं कि यह मृदंग की आवाज है। एक किंवदंती यह भी है कि नीलकमल केवल मानसरोवर में ही खिलता और दिखता है। यहां का नाम सुनते ही मन में श्रद्धा और भक्ति की भावना जागृत हो जाती है। यहां जाना कठिन होता है लेकिन भगवान शिव के दर्शन करने हर साल हजारों श्रद्धालु इन कठिन रास्तों की परवाह किए बिना कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाते हैं।

 

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