कांग्रेस जीत और BJP हार से सबक ले तो 2019 में सरकार किसी की भी बने ,देश को मिलेगा लाभ!

in 2019 the government becomes anyone, the country will get benefits!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों में भाजपा के हाथ से उसके तीन महत्वपूर्ण राज्यों की सत्ता निकल गई है। ये राज्य हैं – मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़। इन तीनों राज्यों में कांग्रेस भाजपा को मात दी है। इसी के साथ ही भाजपा की क्रुर दमनकारी नीतियों के चक्र का चक्काजाम हो गया है। 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिए यह बड़ा झटका है और इस झटके का देश को बड़ा लाभ मिलेगा  भाजपा अपनी हार से सबक लेगी तो उसे देश हित में कार्य कर अपनी छवि को सुधार कर चुनाव की तैयारियों में क्रुर दमनकारी नीतियों को खत्म कर आम जन के हित में कार्य करना होगा। जिससे 2019 में भले ही देश में किसी भी पार्टी की सरकार बने लेकिन आमजन और छोटे करोबारियों को राहत की उम्मीद मिल सकती है।

बता दें कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ का 2014 के लोकसभा चुनाव में अहम रोल रहा था। केंद्र में बीजेपी की सरकार बनाने में इन तीनों राज्यों की जनता ने दिल खोलकर नरेंद्र मोदी के समर्थन में वोट किए। इन तीनों राज्यों के कुल 65 लोकसभा सीटों में से 62 पर से 2014 में कमल खिला था।लेकिन आखिर पिछले 4 साल में ऐसा क्या हो गया जो जनता ने अब विधानसभा चुनाव में बीजेपी को नकार दिया है। हिंदी भाषी इलाकों में बीजेपी की पकड़ मजबूत मानी जाती है। जानकारों का कहना है कि लोगों में राज्य सरकार के साथ-साथ मोदी सरकार से भी उम्मीदें काफी थीं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।मोदी ब्रांड बीजेपी का ब्रह्मास्त्र है, जो 2014 से लगातार विरोधियों को परास्त कर रहा है।बीजेपी इसी के सहारे कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देख रही है। इन विधानसभा चुनावों में हार की वजह से सबसे बड़ी चोट इसी पर पड़ी है। चाहे किसानों का मुद्दा हो, राफेल हो, रोजगार हो या फिर भ्रष्टाचार… कांग्रेस हर बार इन आरोपों के जरिए इसी पर ही चोट कर रही है। जिसका असर इन चुनाव परिणाम में झलक रहा है।

 किसानों की BJP से नाराजगी, राहुल ने किया वादा
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में शहरी के मुकाबले ग्रामीण आबादी ज्यादा है। यहां अब भी 70 से 80 फीसदी ग्रामीण पूर्ण रूप से कृषि पर निर्भर हैं। पिछले साल मध्य प्रदेश के मंदसौर में विरोध-प्रदर्शन के दौरान गोली लगने से किसानों की मौत ने किसानों को बीजेपी से दूर कर दिया। साथ ही पिछले महीने देशभर से किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचे, पहले तो उन्हें दिल्ली की सीमाओं पर रोक दिया गया और फिर उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया। जिससे किसानों में मोदी सरकार के खिलाफ नाराजगी साफ दिखी। वहीं बीजेपी सरकार से त्रस्त किसानों के लिए कर्जमाफी का ऐलान करने वाली कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जैसी ही हमारी सरकार बनेगी किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। जिससे अब बीजेपी को भी सबक मिल गया है और उम्मीद है कि वह किसानो को गंभीरता से लेगी और उनके हित में कार्य करेगी ,चाहे मजबूरी दर्जे ही अगर मोदी सरकार को अपना अस्तित्व बनाए रखना है तो उसे भी अन्नदाताओं के लिए कार्य करना ही होगा।

बेरोजगारों को रोजगार का इंतजार
देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है और अब लोगों में इसके खिलाफ गुस्सा भी दिखने लगा है।मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल बीजेपी की सरकार थी, यहां के युवाओं में रोजगार को लेकर राज्य सरकार से लेकर मोदी सरकार से उम्मीदें थीं।लेकिन अब तक पूरी नहीं हुई. दरअसल, लोकसभा चुनाव 2014 से पहले नरेंद्र मोदी ने हर साल 2 करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लोगों ने चार साल तक रोजगार का इंतजार किया। लेकिन अब लोगों के सब्र का बांध टूट रहा है और नतीजा सामने है। इन मुद्दों पर उमंमीद जताई जा रही है कि गंभीरता से विचार कर मोदी सरकार 2019 में जीत हासिल करनो के लिए अपने वादे को पूरा करने कि कवायद करेगी। यदि ऐसा होगा तो देश को बेरोजगारों को इसका लाभ मिलेगा।

नोटबंदी-GST का असर, छोटे व्यापारियों की बिगड़ी अर्थव्यवस्था

हमेशा से व्यापारी वर्गों का समर्थन बीजेपी को रहा है। लेकिन पहले नोटबंदी और फिर GST ने इस वर्ग को खासे नाराज कर दिया। कुछ व्यापारियों का कहना है कि GST को लेकर उनके मन में अभी भी कई सवाल हैं। वहीं नोटबंदी की वजह से किसानों की जमापूंजी पर ग्रहण लग गया। कांग्रेस ने पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान नोटबंदी और GST के मुद्दे को जमकर उछाला, और नाराज लोगों को अपने पाले में करने में सफल भी रही। राहुल गांधी ने इस जीत का श्रेय कांग्रेस कार्यकर्ता, किसान, युवा और छोटे दुकानदार को दिया है। यह अपने आप में बड़ी बात है कि जब छोटे दुकानदारों जो की देश कि अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते है उन्हे इस तरह मुद्दा बनाकर उनकी समस्याओं को उजागर कर सामने लाया गया है। यह देश कि राजनीति में पहली बार हुआ है और उम्मीद है कि अब इसका लाभ भी उन्हे जल्द ही मिलेगा। दमनकारी नीतियों का अंत नहीं भी होगा तो यह तो निश्चित है कि भाजपा सबक लेगी और कम से कम कोई नई दमनकारी नीति का लोकार्पण नहीं करेगी।

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