उत्तराखंड में दर्दनाक हादसा, स्कूल की चहारदीवारी के साथ खाई में गिरी मासूम छात्राएं ,गंभीर घायल

प्रदेश में शिक्षा का कितना ख्याल रखा जाता है इस गंभीर मुद्दे की असलियत को दर्शाता दर्दनाक मामला पिथौरागढ़ से सामने आया है। यहां तहसील मुख्यालय से 50 किमी दूर बुंगबुंग के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की चहारदीवारी ढह गई। जिसके साथ ही वहां खेल रहीं दो मासूम बच्चियां भी चहारदीवारी के साथ ही 60 फीट खाई में गिर गईं। इससे दोनों गंभीर घायल हो गईं। है दोनों को हायर सेंटर रेफर किया गया है।

जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ से सटे राजकीय प्राथमिक विद्यालय की चहारदीवारी जून 2018 की बरसात में क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से दीवार लगातार क्षतिग्रस्त हो रही है। कई बार मरम्मत की मांग करने के बाद भी चहारदीवारी को दुरुस्त नहीं किया गया। इस लापरवाही का खामियाजा बच्चियों को भुगतना पड़ा। बुंगबुंग निवासी बबीता (13) पुत्री धन सिंह बिष्ट, यक्षिता (3) पुत्री जीवन सिंह अन्य बच्चों के साथ सुबह करीब 11 बजे स्कूल के मैदान में खेल रहीं थीं। इसी दौरान स्कूल की चहारदीवारी ढह गई। चहारदीवारी के साथ बच्चियां भी करीब 60 फीट खाई में जा गिरीं। लोगों ने दोनों बच्चियों को खाई से निकाला और उनका घरेलू उपचार कराया। दोनों बच्चियों के सिर, आंख और पैर में चोट लगी है। जिसके बाद उन्हे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। घायल छात्रा बबीता जूनियर हाईस्कूल में 8वीं में पढ़ती है। यक्षिता आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ती है। यक्षिता की मां विमला देवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।

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बता दें कि प्राथमिक विद्यालय बुंगबुंग में जूनियर हाईस्कूल सिमखोला का भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण वहां की कक्षाएं भी इसी स्कूल में  संचालित होती हैं। इतना ही नहीं गांव का आंगनबाड़ी केंद्र भी इसी विद्यालय में चलता है। जिसके बाद भी भवन को जर्जर हालात में और बड़े हादसे होने के इंतिजार में शायद शासन ने छोड़ दिया है। हादसे में घायल बच्चियों का जिम्मेदार किसे माना जाए । एक तरफ सर्व शिक्षा अभियान , शिक्षा को अहमियत देने के दावे और धरातल पर जर्जर भवन सरकार की नीतियों को जगजाहिर करते है। सरकार की योजनाए महज कागजों में ही रहती है।

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