पूजा पाठ में इन नियमों का रखें ध्यान, होगी हर मुराद पूरी

नई दिल्ली। हिन्दू धर्म अनुयायियों  के लिए पूजा-पाठ का बड़ा महत्व है। लोग सच्चे मन से भगवान की उपासना करते हैं। जिसका पालन करने से व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। फिर यह पूजा चाहे देव पूजा हो या पितर पूजा। अगर इन नियमों का ध्यान रखा जाए तो व्यक्ति द्वारा की गई पूजा अधिक फल देती है। तो आईए जानें पूजा से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें जिन पर अमल करने से अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।

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दान-दक्षिणा देते समय दाहिने हाथ का इस्तेमाल करें

जब भी जाप करें, दाहिने हाथ को कपड़े अथवा गौमुखी से ढक कर करें। जाप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाएं। किसी को दान-दक्षिणा देते समय दाहिने हाथ का इस्तेमाल करें। शंकर जी को बिल्वपत्र, श्री विष्णु को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, मां लक्ष्मी को कमल प्रिय हैं। इन्हें ये चीजें अवश्य अर्पित करें। भगवान शिव को कुंद, श्री विष्णु को धतूरा, देवी मां को आक तथा मदार और सूर्य भगवान को तगर के फूल कभी न चढ़ाएं। अक्षत का फूल देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ाएं। विष्णु भगवान को चावल, गणेश जी को तुलसी, मां दुर्गा और सूर्य नारायण को कभी भी बिल्व पत्र नहीं चढ़ाएं। पुरूष धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर ही कर्म-काण्ड की क्रियाएं सम्पन्न करें। इससे उन्हें शुभ फल प्राप्त होते हैं। घी का दीपक अपने बांई ओर तथा देव प्रतिमा को दाहिने ओर रखें एवं चावल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें। पूजा के दौरान कभी भी एक दीपक से दूसरे दीपक को न जलाएं। कहीं भी देव प्रतिमा, मंदिर आदि दिखे तो दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम अवश्य करें।

 

 

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