इन चीजों का ध्यान रखें किडनी फिट रहेगी।

भारत में हर सौ में से 17 लोग किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं। जो उच्च रक्तचाप, डायबिटीज या किडनी फेल्योर के पारिवारिक इतिहास के कारण होता है।
किडनी हर दिन हमारे 200 लीटर खून को फिल्टर करती है और इसमें 2 लीटर विषाक्त पदार्थ, अपशिष्ट और पानी निकलतेे हैं। हमारी किडनी शरीर के तरल पदार्थ के स्तर को नियंत्रित रखती है।
कई बार किडनी धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती है। लेकिन रोगी इसके कारण तब तक बीमार महसूस नहीं करता है, जब तक किडनी खराब नहीं हो जाती है। इसलिए किडनी की बीमारी के बारे में जागरूक रहने से बीमारी की रोकथाम और बीमारियों का शीघ्र पता लगाना जरूरी है।
शुरुआती दौर में ही किडनी की बीमारी का इलाज हो जाए तो बहुत बार दवाइयों से ही यह बीमारी ठीक हो जाती है। किडनी की बीमारी के लक्षण हैं- पेशाब में प्रोटीन आना और यूरिया में क्रीयेटिन का स्तर बढ़ना। यह ग्लोमेरुल नेफ्राटाइटिस नामक बीमारी के लक्षण होते हैं। अधिकतर लोग शुरुआती लक्षणों को नजरंदाज करते हैं, लेकिन शुरुआत में ही किडनी बायोप्सी करा लें तो ग्लोमेरुल नेफ्राटाइटिस (किडनी की बीमारी) का इलाज किया जा सकता है। और किडनी की अज्ञात समस्याओं का पता लगाने के लिए अलग से ‘क्रिएटिनिन परीक्षण’ (एक तरह का किडनी टेस्ट) नहीं करायें।
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि केवल वृद्ध लोग ही किडनी की बीमारी के शिकार होते हैं तो यह गलत हैं। यह बीमारी बच्चों को भी हो सकती है। बच्चे स्वस्थ रहें, इसके लिए किडनी की बीमारी का प्रारंभिक अवस्था में ही पता लगाना बहुत जरूरी है। यदि बच्चे का वजन नहीं बढ़ पा रहा है, उसकी शारीरिक वृद्धि कम हो रही है, उसके शरीर में बार- बार दर्द होता है, पेशाब करने में कठिनाई होती है या पेशाब करने में अधिक समय लगता है, सुबह उठते समय उसके चेहरे, पैरों या टखनों में सूजन होती है तो उसे किडनी की समस्या हो सकती है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए इन सुझावों पर चलें किडनी की बीमारी का खतरा कम हो सकता है। साल में एक बार शारीरिक परीक्षण के दौरान अपनी किडनी की जांच कराना महत्वपूर्ण है। यदि आप डायबिटीज या उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित हैं तो आपको किडनी की बीमारी होने का खतरा अधिक है। दो साधारण परीक्षण हैं – एल्ब्यूमिन (एक तरह का प्रोटीन) की जांच के लिए मूत्र परीक्षण कराएं। मूत्र में बहुत अधिक प्रोटीन होता है तो इसका मतलब यह है कि किडनी के फिल्टर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और प्रोटीन का रिसाव शुरू हो रहा है।
क्रिएटिनिन की जांच के लिए रक्त परीक्षण कराएं। क्रिएटिनिन के स्तर ईजीएफआर से यह पता चलता है कि किडनी रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को कितने प्रभावी तरीके से छान रही है।

उच्च रक्तचाप और डायबिटीज किडनी की बीमारी के दो प्रमुख कारण हैं। यहां तक कि उच्च रक्तचाप (प्री- हाइपरटेंशन) और रक्त शर्करा का अधिक स्तर, जिसे सामान्यतरू ‘प्री- डायबिटीज’ कहा जाता है, किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

वजन काबू में रखना आपकी किडनी की सेहत के लिए भी जरूरी है। मोटापा किडनी की बीमारी के दो प्रमुख जोखिम कारकों, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप होने के खतरे को भी बढ़ाता है। वजन कम करने से इन जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।

धूम्रपान किडनी के अलावा किडनी को क्षति पहुंचाने वाली डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की स्थिति को ज्यादा खराब कर देता है। धूम्रपान का असर आपकी सेहत पर समग्र रूप से दिखाई देगा।

खान-पान पर नजर रखें
नमक का सेवन कम करें और संसाधित खाद्य पदार्थों से मिलने वाले उच्च सोडियम स्तर पर नजर रखें, क्योंकि ये उच्च रक्तचाप पैदा कर सकते हैं और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बहुत अधिक सोडियम के इस्तेमाल से उच्च रक्तचाप हो सकता है, इसलिए नमक का सेवन कम करना बेहतर होता है। रोजाना लगभग 1.5 से 2.3 ग्राम नमक का सेवन करना चाहिए। किडनी की समस्याओं से बचने के लिए बच्चों को तरल पदार्थ, विशेष रूप से पानी का अधिक सेवन करना चाहिए।

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