महाशिवरात्रि आज , ऐसे करे भगवान शिव की पूजा

Mahashivaratri Today, doing such a worship of Lord Shiva

महाशिवरात्रि है, जिसके लिए द्रोणनगरी शिवमय हो चुकी है। श्री टपकेश्वर महादेव, पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर समेत तमाम शिवालय रंग-बिरंगी रोशनी से जगमग हैं । ज्योतिषाचार्य प्रदीप के मुताबिक, प्रथम पहर की पूजा रविवार रात्रि 9:41 से 12:46 रात्रि तक। जबकि द्वितीय पहर की पूजा रात्रि 12:46 से सुबह 3:51 तक है। तृतीय पहर की पूजा सुबह 3:51 से लेकर सुबह 6:51 तक रहेगी। जबकि चतुर्थ पहर की पूजा सुबह सात बजे से सोमवार देर शाम तक रहेगी।

राशि के अनुसार करें अभिषेक

  • मेष: गंगाजल, लाल पुष्प, गेहूं।
  • वृषभ: कुशा, जल, दही।
  • मिथुन: दही, दूध, गंगाजल।
  • कर्क: गन्ने का रस, गुलाबी फूल।
  • सिंह: शहदयुक्त जल।
  • कन्या: इत्रयुक्त जल, पीला फूल।
  • तुला: दूध, चावल, जल।
  • वृश्चिक: शक्कर, दूधयुक्त जल, गेहूं।
  • धनु: गंगाजल के साथ शुद्ध घी, गेहूं।
  • मकर: सरसों का तेल और लाल फूल।
  • कुंभ: गंगाजल और दही।
  • मीन: शहद, दूध और जल।

ऐसे करें जलाभिषेक

आचार्य संतोष खंडूड़ी ने बताया कि शिवरात्रि के दिन बेलपत्र, धतूरा, धूप, दीप, मिष्ठान, मौसमी फल, पुष्प, चंदन आदि शिव को अर्पित करना चाहिए। गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद से अभिषेक करें और ऊं नम: शिवाय का जाप करते रहें। पौराणिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति वर्ष भर कोई उपवास नहीं रखता है और वह मात्र महाशिवरात्रि का व्रत रखता है तो उसे पूरे वर्ष के व्रतों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। बता दें कि इससे पूर्व 30 वर्ष पहले महाशिवरात्रि दो दिन मनाई गई थी। शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। शिव रात्रि पर चार प्रहर की पूजा से सभी प्रकार की कामनाएं पूर्ण होती है।
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कांवड़ के जल से भगवान शिव होते हैं प्रसन्न-
शास्त्रों के अनुसार कंधे पर कांवड़ रखकर बम बम का नारा लगाते हुए जो व्यक्ति भगवान शिव का अभिषेक करता है उसे हर कदम पर अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। कांवड़ का जल भगवान शिव को अधिक प्रिय है। भोलेनाथ को गाय के दूध से अभिषेक करने पर पुत्र प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। जबकि गन्ने के रस से लक्ष्मी प्राप्ति, दही से पशु आदि की प्राप्ति, घी से असाध्य रोगों से मुक्ति, शर्करा मिश्रित जल से विद्या बुद्धि, कुश मिश्रित जल से रोगों की शांति, शहद से धन प्राप्ति, सरसों के तेल से महाभिषेक करने से शत्रु का नाश होता है।

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