उमंग और उल्लास के साथ नववर्ष का आगाज, उत्सकुता भी, बेफ्रिकी भी

देहरादून। बीते वर्ष का आखरी दिन आम दिनों की तुलना में थोड़ा खास था। इस शाम का अलग ही नजारा था। वातावरण में उत्सकुता भी थी और एक बेफ्रिकी भी। रात जैसे-जैसे गहरी होती गई,  माहौल में उमंग और उल्लास बढ़ता गया। सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों में एक अलग रौनक थी। रात के साथ ठंड भी परवान चढ़ रही थी तो उमंगें भी जवां हो रही थी। और हो भी क्यों न। यह रात आम नहीं बल्कि खास थी। 2018 अब गुजरा हुआ कल बनने जा रहा था और और नया साल फिर लोगों को नई उम्मीद की किरण दिखाने के लिए दरवाजे पर दस्तक दे रहा था।  पुराने साल विदाई के साथ ही नई उम्मीदों के साथ नए साल का अभिनंदन हुआ। जगह-जगह डीजे की धुन पर लोग थिरकते रहे तो कहीं जाम से जाम टकराए गए।

पुरे देश में नए साल के स्वागत और पुराने साल की विदाई के लिए सुबह से ही तैयारी शुरू हो गई थीं। सूरज ढलते ही जश्न में डूबने की हर किसी ने अपने-अपने अंदाज में प्लानिंग की थी। कोई ऑफिस से जल्द घर आने को आतुर था तो कोई थर्टी फर्स्ट के आयोजन को अंतिम रूप देने में जुटा था। दिन चढ़ने के साथ इसमें तेजी आने लगी और बनने लगा उल्लास का माहौल। शहर के अधिकतर होटल-रिजॉर्ट में लेट-नाइट पार्टी आयोजित हुई। कई रेस्तरां में डिनर के लिए खास तैयारी की गई थी। नए साल से शराब छोड़ने का संकल्प लेने वालों ने भी साल आखिरी दिन अपना खूब ‘मूड’ बनाया। सोशल मीडिया फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप शुभकामना संदेशों से पटे रहे।

नया ढेरों उम्मीदें लेकर हमारे जीवन में आया है। अपनी खुशियों को और बढ़ाने के लिए लोगों ने बुरी आदतों से तौबा के लिए संकल्प भी लिए हैं। किसी ने सिगरेट, शराब, तंबाकू छोडऩे का प्रण किया है तो किसी ने गंदगी नहीं फैलाने और सुबह जल्दी सोकर उठने का। आशा है कि ये लोग अपने संकल्पों को अच्छी तरह से निभाएंगे।

 

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