परमाणु – द स्टोरी ऑफ पोखरण ने पहले ही दिन उम्दा अदाकारी से जीता दिल , जानें क्या है खास

परमाणु द स्टोरी ऑफ पोखरण आखिरकार 25 मई को बड़े परदे पर आगे और आते ही पहले दिन फिल्म की अदाकारी ने सबका दिल जीत लिया। यह फिल्म लंबे समय से तैयार है और दिसम्बर में रिलीज़ होने वाली थी। उसी दौरान संजय लीला भंसाली की पद्मावत की भी रिलीजिंग थी ,लेकिन विवादों के चलते फिल्म आगे-पीछे होती रही जिसका असर कई फिल्मों की रिलीज पर हुआ, जिसमें से एक जॉन अब्राहम की परमाणु भी थी। पद्मावत की रिलीजिंग के बाद जॉन का परमाणु फिल्म निर्माताओं से विवाद हुआ और रिलीज टलती गई। आज यह फिल्म बड़े पर्दे पर देश भक्ति की भावना को उजागर कर धमाल मचा रही है।

फिल्म का असली सितारा इसका विषय और कहानी
फिल्म के निर्देशक अभिषेक शर्मा है। इस फिल्म में स्टार कास्ट: जॉन अब्राहम, बोमन ईरानी, डायना पैंटी, विकास कुमार, योगेंद्र टिक्कू, दर्शन पांडेय,अनुजा साठे जैसे सितारे हैं जिनकी स्टार वैल्यू बहुत कम है। ये ऐसे सितारे नहीं हैं जो केवल अपने दम पर फिल्म पहले वीकेंड पर भीड़ जुटा लेते हों। फिल्म का प्रचार भी बहुत ज्यादा नहीं हुआ, लिहाजा ओपनिंग थोड़ी प्रभावित मानी जा रही थी। इस फिल्म का असली सितारा इसका विषय और कहानी है। 1998 में पोखरण में भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किए थे। इस वास्तविक घटना और काल्पनिक किरदार को जोड़ कर यह फिल्म तैयार की गई है। लिहाजा फिल्म का विषय ही दर्शकों का मुख्य आकर्षण है। बता दे की फिल्म की अवधि 2 घंटा 10 मिनट है। ट्रेड एनालिस्टों का कहना है कि फिल्म पहले दिन 4.75 कोरड़ से 5.25 करोड़ रुपये तक का कलेक्शन कर सकती है।

यह भी पढ़े :ट्रकों से आया परमाणु बम , ऐसे सीक्रेट तरीके से हुआ था पोखरण परीक्षण , उड़ गए थे पूरी दुनिया के होश

‘न्यूक्लियर पॉवर’ की दास्तान विलक्षण
बता दे की 1998 में भारत के ‘न्यूक्लियर पॉवर’ बनने की दास्तान अपने आप में विलक्षण कहानी थी। उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ मिलकर भारत को न्यूक्लियर महाशक्ति बना दिया। इस पूरे प्रकरण के पीछे की कहानी को इस फिल्म में दिखाया गया है। परमाणु फिल्म की कहानी साल 1998 में पोखरण में किए गए परमाणु टेस्ट के बारे में है जब अमरीका और विश्व की अन्य एजेंसियो की निगरानी करती सैटेलाइट्स को चकमा देकर भारत ने सफल परमाणु परीक्षण कर दिखाया था। हालांकि फिल्म सच्ची घटना पर आधारित होने का दावा करती है लेकिन इस फिल्म में कुछ घटनाएं काल्पनिक भी हैं। कहानी एक ऐसे ऑपरेशन की जिसके ज़रिए भारत ने अपनी ताकत का लोहा पूरी दुनिया से मनवाया था और ज़ाहिर है। इस फिल्म में देशभक्ति की भावना कूट कूट कर भरी है। हालांकि फिल्म में काल्पनिकता है लेकिन इसके बावजूद कहानी दिलचस्प है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *