पिथौरागढ़ उपचुनाव में भाजपा ने मारी बाज़ी |

पिथौरागढ़ उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. प्रकाश पंत की पत्नी श्रीमती चंद्रा पंत ने कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती अंजू लुंठी को हराकर प्रदेश में भाजपा की जीत का सिलसिला जारी रखा है। खास बात ये है कि चंद्रा पंत ने स्व. प्रकाश पंत से भी बड़ी जीत दर्ज की है। प्रकाश पंत ने 2017 के विधानसभा चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी मयूख महर को 2684 मतों से हराया था, जबकि चंद्रा पंत की जीत का मार्जिन 3267 है। यही नहीं 2017 में प्रकाश पंत को 50.23 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि चंद्रा पंत को उपचुनाव में 51.6 प्रतिशत मत मिले हैं।
पिथौरागढ़ उपचुनाव में जीत के बाद एक बार फिर यह साबित हो गया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में भाजपा अजेय रही है। दरअसल 2017 की प्रचंड जीत के बाद उत्तराखंड में हुए तमाम चुनावों में भाजपा ने बाजी मारी है। पिछले तीन साल में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में ही उपचुनाव, नगर निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव लड़े, लिहाजा इन चुनावों में सीएम त्रिवेंद्र की साख दांव पर थी।
भाजपा को एक हार मिलती तो मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र के विरोधी उनके खिलाफ और मुखर हो जाते। लेकिन सीएम त्रिवेंद्र ने सूझबूझ और धैर्य से सभी बाधाओं को पार कर पार्टी को जीत दिलाई। साल 2018 में थराली उपचुनाव में सीएम त्रिवेंद्र ने खुद मोर्चा संभाला और श्रीमती मुन्नी देवी शाह को जीत दिलवाई। इसके बाद 2018 के नगर निकाय चुनाव भी सीएम की छवि पर लड़े गए। भाजपा ने सात में से पांच मेयर पदों पर प्रचंड जीत हासिल की, तो सीएम त्रिवेंद्र की छवि और मजबूत होती गई। 2019 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर नरेंद्र-त्रिवेंद्र की जुगलबंदी और रणनीति पर जनता ने भरपूर प्यार लुटाया और पांचों सीटें रिकॉर्ड मतों से भाजपा की झोली में डाली। सीएम त्रिवेंद्र की रणनीति के आगे विरोधी पस्त हुए, साथ ही बार बार सत्ता परिवर्तन के कयासों पर भी विराम लग गया।
लोकसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव भाजपा के लिए लिटमेस टेस्ट से कम नहीं था। त्रिवेंद्र सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए दो बच्चों और न्यूनतम शैक्षिक योग्यता की शर्त रख दी थी इसके बावजूद भी जनता ने त्रिवेंद्र सरकार के कामकाज को कसौटी पर रखकर भाजपा के पक्ष में जनमत दिया। 12 में 9 जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर भाजपा के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 2 पर जीत मिली। भाजपा कुल 89 पदों में से 45 पर अपनी पार्टी के ब्लॉक प्रमुख बनाने में कामयाब रही। कई जगहों पर भाजपा के बागी जीते, लेकिन कांग्रेस महज 26 ब्लॉक प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कर सकी।