उत्तराखंड में अभी तक शुरू नहीं हुई RTE के तहत दाखिले की प्रकिया, संकट में हजारों गरीब छात्रों का भविष्य

उत्तराखंड में अभी तक शुरू नहीं हुई RTE के तहत दाखिले की प्रकिया
उत्तराखंड में अभी तक RTE के तहत दाखिले की प्रकिया शुरू नहीं हुई है। विघालयों में 1 अप्रेल से नया सत्र शुरू होने जा रहा है कई स्कूलों में कोर्स भी मिलना शुरू हो गया है। लेकिन अभी तक RTE के तहत दाखिले शुरू न होने से हजारों गरीब और अपवंचित वर्ग के बच्चों के प्रवेश पर संकट के बादल छाए हैं। वहीं प्रशासन सुस्त है अभी तक बीते सत्र का 237 करोड़ का बकाया भी सरकार पर बाकी है। जिससे छात्रों को और ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों को यह तक पता नहीं कि आरटीई के तहत इस वर्ष एडमिशन होंगे या नहीं।
बता दें कि अन्य राज्यों में RTE के तहत  2019-20 सत्र के लिए ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन उत्तराखंड में प्रशासन अभी तक शायद नींद से जागा ही नहीं है। विघालयों में अप्रेल माह में नया सत्र शुरू होने वाला है, और RTE के तहत प्रवेश की इस प्रक्रिया में एक माह से अधिक का समय लगता है। जिसके बावजूद अभी तक प्रवेश प्रकिया शुरू नहीं की गई है। वहीं दूसरी और पिछले दो वर्षों में विद्यालयों को एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया गया है।ऐसे उन छात्रों का भविष्य भी संकट में है जिनका प्रवेश  RTE के तहत हुआ है। पैसा न मिलने से विघालय भी ऐसे बच्चों अनदेखी कर उनके भविष्य से खिलवाड़ करते है। सरकार की योजनाए चौपट होती नजर आ रही है।
आपको बता दें कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों की पहली कक्षा में 25 फीसदी सीटों पर गरीब और अपवंचित वर्ग के बच्चों को मुफ्त प्रवेश दिया जाता है।जिसमे अपवंचित वर्ग में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ी जाति, दिव्यांग, एचआईवी पीड़ित, विधवा, निराश्रित और तलाकशुदा लोगों के बच्चे शामिल हैं। वहीं निर्धन वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे शामिल होते हैं। जिसके लिए  प्रवेश के बदले सरकार निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति व्यय का भुगतान करती है।  लेकिन विद्यालयों को वर्ष 2017-18 और 18-19 के प्रतिपूर्ति व्यय के रूप में 237.41 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। जो अभी बाकी है।  पिछले वर्ष राज्य की 95992 सीटों पर बच्चों को प्रवेश दिया गया था। लेकिन इस सत्र में बच्चों के प्रवेश को लेकर अब तक असमंजस बना हुआ है।

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