उत्तराखंड के हिमवीरों ने किया ऐसा काम , दुनिया कर रही सलाम , पढ़े पूरी खबर

उत्तराखंड के हिमवीरों ने न सिर्फ एवेरस्ट फतह किया बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया है। हिमवीरों ने एवेरस्ट पर झंडा फेरने के बाद पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए आते समय करीब छह कुंतल कूड़ा कचरा भी एकत्र किया है। जो पर्यारवण को भारी नुक्सान पंहुचा रहा है। उनके इस कार्य को काफी सराहा जा रहा है यह पहला मौका है जब बीएसएफ दल के सभी जवानों ने एकसाथ एवरेस्ट फतह किया। उनके जज्बों को सलाम किया जा रहा है।

दरअसल पिथौरागढ़ निवासी लवराज धर्मशक्तू के नेतृत्व में बीएसएफ का 15 सदस्यीय दल एवरेस्ट फतह कर बेस कैंप पर लौट आया है। बेस कैंप पर लौटने के बाद धर्मशक्तू ने अपने करीबियों से ट्रैकिंग के अनुभव साझा किए। दल में धर्मशक्तू के अलावा उत्तराखंड के तीन और जवान शामिल थे। चोटी तक पहुंचने के लिए बर्फ की चार खाई ही पार करनी पड़ीं। बर्फीली हवाएं भी काफी कम थीं। इस वजह से समिट पर रुकने में परेशानी नहीं हुई। उत्तराखंड के सभी हिमवीरों ने एकसाथ चोटी फतह की। 20 मई को सात और 21 मई को आठ सदस्य एवरेस्ट के बेस कैंप पर लौटे। ट्रैक से लौटते वक्त दल के सभी सदस्य कचरा एकत्र करते हुए आए। बेस कैंप पर पहुंचने के बाद करीब छह कुंतल कचरा डंप किया गया।
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उत्तराखंड की बेटी ने यूरोप की सबसे ऊँची छोटी पर लहराया तिरंगा
वहीं पर्वतारोही कुमारी अमीषा चौहान ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से गुरूवार सांय को मुख्यमंत्री आवास में शिष्टाचार भेंट की। यूरोप महादीप की सबसे ऊंची चोटी माऊंट एलबस के सफल आरोहण कर स्वदेश लौटी कुमारी अमीषा ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र को बताया कि उन्होंने यह अभियान 06 मई, 2018 को रात 2ः38 बजे शुरू किया, तथा उन्होंने मांउट एलबस पर राष्ट्रीय झंडे के साथ-साथ ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ‘‘ का बैनर भी फहराया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने पर्वतारोही कुमारी अमीषा को उनके सफल प्रयास के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।मुख्यंमत्री ने कहा कि इस उपलब्धि से यह बात फिर से साबित हुई है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं हैं तथा वे किसी भी मुकाम को छू सकती हैं। उनका यह साहसिक प्रयास देश के करोड़ो युवाओं विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राज्य में खेलों को प्रोत्साहित करने तथा खेल संस्कृति विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

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