खौफनाकः प्यार पाने के लिए युवती ने अपने ही परिवार के सात लोगों को उतारा मौत के घाट, हो सकती है फांसी

प्यार पाने के लिए एक युवती ने ऐसा खौफनाक कदम उठाया कि सबका दिल दहल गया। उसने अपने ही परिवार के सात लोगों को उतारा मौत के घाट उतार दिया और पुलिस को गुमराह करने के लिए लूट कि कहानी बता पछाड़े खाकर रोने लगी। पुलिस जांच में मामला खुल गया कि मां बाप और भाइयों के साथ ही सात माह के भतीजे अर्श की नृशंस हत्या करते वक्त शबनम के हाथ नहीं कांपे। तबसे वह जेल में है और  फांसी का फंदा सिर पर लटकता देख अब रहम के लिए गिड़गिड़ा रही है।

बता दें कि  घटना इतनी खौफनाक थी और इसका असर इतना गहरा हुआ कि उस गांव में कोई भी अपनी बेटी का नाम शबनम नहीं रखना चाहता। जबसे यह घटना हुई है इस गांव में किसी ने भी अपनी बच्‍ची का यह नाम शबनम नहीं रखा।  घटना को याद कर आज भी गांववासी सिहर उठते हैं, अमरोहा जिला मुख्‍यालय से महज 20 किलोमीटर दूर बावनखेड़ी गांव में  14 जनवरी, 2008 की काली रात थी, जब शबनम नाम की एक युवती ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर इस जघन्‍य वारदात को अंजाम दिया था। तब उसकी उम्र करीब 25 साल थी। शबनम ने अंग्रेजी और भूगोल में डबल एमए किया था और एक स्‍कूल में टीचर के तौर पर काम भी कर रही थी, लेकिन उसे एक ऐसे शख्‍स से प्‍यार हो गया, जो मजदूरी करता था और छठी फेल था। शबनम ने सलीम के साथ मिलकर अपने पूरे परिवार का सफाया कर दिया। तब वह 7 हफ्ते की गर्भवती थी। शुरुआत में उसने यह दलील देकर खुद को बचाने की कोशिश की कि लुटेरों ने उसके परिवार पर हमला कर दिया था और बाथरूम में होने की वजह से वह बच निकलने में कामयाब रही थी। लेकिन परिवार में चूंकि वही एकमात्र जिंदा बची थी, इसलिए पुलिस का शक उस पर गया और कॉल डिटेल खंगाली गई तो सच आखिर सामने आ गया। जिसके बाद उसने खुद उस रात कि खौफनाक कहानी सनाई किस तरह उसने अपने परिवार को मौत के घाट उतारा जिसे सुन पुलिस के भी पैरों तले जमीन निकल गई।

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इसी महीने आएगा फैसला

आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश की यह घटना सबसे दर्दनाक और भयानक घटनाओं की लिस्ट में शामिल है, जिसे पूरा देश जानता है।शबनम और सलीम को दो साल बाद ही अमरोहा की सत्र अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। निचली अदालत के फैसले पर बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी। शबनम पिछले करीब 11 साल से 8 माह के बच्चे सहित 7 लोगों की हत्या के मामले में जेल में बंद है। शबनम और सलीम का बेटा अब करीब 10 साल का हो चुका है, जिसका लालन-पालन बुलंदशहर के एक पत्रकार और उनकी पत्‍नी  करती हैं। प्रदेश में यह किसी महिला बंदी का फांसी का पहला मामला है। शबनम ने रिवीजन में जाने के बजाए जेल अधिकारियों से कहा है कि वो सीधे महामहिम राष्ट्रपति से क्षमा मांगेगी। राष्ट्रपति ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा है। अब एक बार फिर शबनम ने सुप्रीस कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली है, जिस पर इसी महीने फैसला आना है।

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