उत्तराखंड के दुर्गम का एक ऐसा स्कूल जहां बहुत कुछ होता है बेहद खास, जानिए ..

उत्तराखंड  में जहाँ आज कई सरकारी विद्यालय बंद हो चुके है वहीं राजकीय प्राथमिक विद्यालय अल्मोड़ा के बजेला में एक ऐसा स्कूल है जहां प्राइवेट स्कूलों के बच्चे भी पढ़ना चाहते है। स्कूल में छात्र संख्या बढ़ रही है। इस विघालय में अध्यापक न केवल अपने शैक्षिक उत्तरदायित्व भली भांति निभा रहें है बल्कि सेवित क्षेत्र मे कई सामाजिक ,शैक्षिक , स्वच्छता व नशा उन्मूलन(सभी कार्य विद्यालय समय उपरांत) के कार्यों मे सलग्न है, जिससे न केवल क्षेत्र मे शिक्षा का उत्थान हो रहा है, क्षेत्र मे लोगो का रुझान सरकारी शिक्षा हेतु बढ़ा है । लेकिन अफसोस विघालय में प्रगती के बाद भी शासन और शिक्षा विभाग द्वारा किसी प्रकार की सहायता नहीं है।

बता दें कि प्रदेश के अल्मोड़ा जिले के विकासखंड धौलादेवी ,बजेला में अति दुर्गम क्षेत्र मे संपर्क मार्ग से 6km की पैदल दूरी पर स्थित  राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला में छात्र संख्या बढ़ रही है। विद्यालय के कक्षा 1 के बच्चें भी धारा प्रवाह से हिंदी और अंग्रेजी पढ़ते है तथा गणित की सभी मुख्य संक्रियाएं कर रहें है,बच्चों का शैक्षिक स्तर किसी भी प्रकार से अन्य प्रकार (पब्लिक स्कूल) के विद्यालयों के छात्रों से कम नही है। विघालय में चार भाषाओं मे प्रार्थना सभा होती है।

बच्चो मे वैज्ञानिक अभिरुचि जागृत करने के लिए विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है। दीवार पत्रिका, कॉमिक निर्माण,मेरी दीवार, मास्क निर्माण ,पपेट शो, बॉक्स फ़ाइल निर्माण, रोल प्ले, कहानी शिक्षण , फसक , भ्रमण , बाल अखबार, स्वरचित कहानियां, स्वरचित कविताएं ,किस्सा गोई ,कहानी रूपांतरण , चित्रों से कहानी निर्माण, आओ बच्चों मुखोटे लगाये, कबाड़ से जुगाड़, MAD का प्रयोग ,भाषा गत विषमताओं हेतु मौलिक कार्य आदि उनके कुछ नवाचार है।विद्यालय मे किचन गार्डन का निर्माण है जहाँ सभी प्रकार की सब्जियां उगाई जाती है व बच्चों के मध्याह्न भोजन हेतु प्रयोग की जाती है।

हर विघालय को है ऐसे कर्मठ अध्यापक की जरूरत

राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला में सहायक अध्यापक पद पर एकल अध्यापक भास्कर जोशी तैनात है। वह विद्यालय मे बीते पांच वर्षों से कार्यरत है। जब उनकी तैनाती विघालय में हुई तब छात्र संख्या 10 से बढ़कर 24 हो चुकी है और यह संख्या भविष्य मे और बढ़ने की उम्मीद है। वह विद्यालय में कई नवाचारी कार्यक्रम विद्यालय चलाते है जिनसे छात्रों का शैक्षिक स्तर बढ़ रहा है। भाषा शिक्षण के लिए वह स्वयं का बनाया उपागम(tool) प्रयोग करते है जो चार मुख्य भाषा कौशलों पर आधारित है।साथ ही (हिंदी , इंग्लिश,संस्कृत) गतिविधि आधारित शिक्षण देते,जिसके बहुत अच्छे परिणाम मिल रहे है।

भास्कर ने विद्यालय में स्वयं के प्रयासों से पुस्तकालय स्थापित किया है जो बच्चों के पढ़ने की रुचि बढ़ा रहा है। बच्चों को स्मार्ट क्लास देने के लिए उन्होंने अपने संसाधनों से विद्यालय मे projector , computer आदि की व्यवस्था की है। कमजोर छात्रों को विद्यालय के बाद पढ़ाते है जिससे वे भी मुख्य धारा मे आ सकें। इतना ही नहीं बच्चों के शैक्षिक विकास के लिए स्वप्रायोजित शैक्षिक भ्रमण का आयोजन करतें है । और अपने स्वयं के संसाधनों से हम विद्यालय मे वार्षिकोत्सव करवाते हैं।

विघालय में यह होते है सामाजिक कार्य

1.क्षेत्र मे नशा उन्मूलन हेतु और अभिभावकों को अपने बच्चों कि शिक्षा दीक्षा हेतु प्रेरित करने के लिए “शिक्षा का प्रसार,नशे का तिरस्कार” कार्यक्रम का सफल संचालन
2.क्षेत्र के बच्चों को विज्ञान सिखाने हेतु ” बाल विज्ञान उद्यान” कार्यक्रम का संचालन
3.नशा उन्मूलन हेतु अभिभावकों कि कॉउंसलिंग
4.”स्वच्छ माँ , स्वच्छ बच्चें ” कार्यक्रम का संचालन ।
5.निर्धन बच्चों को स्कूल बैग्स , स्टेशनरी, ग्रीष्मकालीन वस्त्र, शीतकालीन वस्त्र का वितरण किया जाता है
6.बच्चों और गाँव के युवकों हेतु कंप्यूटर शिक्षा(प्रस्तावित)
7.विद्यालय समय उपरांत निम्न उपलब्धि वाले छात्रों हेतु विद्यालय समय उपरांत अतरिक्त शिक्षण कार्य किया जाता है ।
8.हरियाणा स्थित एक NGO ने हमारे कार्यों से प्रेरित हो कर गाँव की एक शिक्षित बेरोजगार युवती को शाम को बच्चो को पढ़ाने हेतु नियुक्त किया है जिससे न केवल बच्चों को अतिरिक्त लाभ मिल रहा है साथ ही साथ एक बेरोजगार युवती को रोजगार भी मिल गया है ।

 

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