शिक्षक दिवस विशेषः भारतीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं इन गुरुओं की महानता

Teachers' day specials: The greatness of these Gurus are recorded in the pages of Indian history

बड़े ही उत्साह के साथ हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन टीचर्स को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। देश-भर में इस दिन स्टूडेंट अपने टीचर्स को गिफ्ट देकर उनका आभार व्यक्त करते हैं। यह दिन शिक्षक और शिष्यों के बीच प्यार और सम्मान का दिन होता है। शिक्षकों और गुरूओं का हमारे जीवन में बेहद महत्वपूर्ण स्थान हैं। प्राचीन काल से ही गुरूओं का स्थान सबसे ऊपर रहा है। नए दौर में बहुत कुछ बदला पर गुरु-शिष्य परंपरा नहीं बदली।आज हम आपको भारतीय इतिहास के कुछ महान गुरूओं के बारें में बताने जा रहे हैं।

चाणक्य
चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। उन्हें ‘कौटिल्य’ के नाम से भी जाना जाता था. चाणक्य के नाम से प्रसिद्ध एक नीतिग्रंथ ‘चाण-क्य नीति’ भी प्रचलित है। चन्द्रगुप्त मौर्य अपने गुरू चाणक्य के मार्गदर्शन की बदौलत ही नंदवंश का नाश कर राजा बने थे।

द्रोणाचार्य
कौरवों और पांडवों के गुरु रहे द्रोणाचार्य भारतीय इतिहास के महान गुरुओं में से एक हैं. ऐसा कहा जाता है कि द्रोणाचार्य का जन्म उत्तरांचल की राजधानी देहरादून में हुआ था। महाभारत युद्ध के समय वह कौरव पक्ष के सेनापति थे. आपको बता दें कि गुरु द्रोणाचार्य को एकलव्य ने अपना अंगूठा गुरु दक्षिणा के रूप में दिया था।

गुरु वशिष्ठ​
गुरु वशिष्ठ​ राजा दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे।वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने के लिए भेज दिया था। गुरु वशिष्ठ को राजा बने बिना जो सम्मान  प्राप्त था उसके सामने राजा का पद छोटा दिखता था।

परशुराम
परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। मान्यता है कि पराक्रम के प्रतीक भगवान परशुराम का जन्म 6 उच्च ग्रहों के योग में हुआ, इसलिए वह तेजस्वी, ओजस्वी और वर्चस्वी महापुरुष बने। प्रतापी एवं माता-पिता भक्त परशुराम ने जहां पिता की आज्ञा से माता का गला काट दिया, वहीं पिता से माता को जीवित करने का वरदान भी मांग लिया। इस तरह हठी, क्रोधी और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने वाले परशुराम का लक्ष्य मानव मात्र का हित था।

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