पृथ्वी पर जीना होगा दुश्वार, 2030-40 तक हो जाएंगे हिमालय के ग्लेशियर खत्म: रिपोर्ट

The world will live on the misery, 2030-40, the glacier finishes of the Himalayas

धरती की सतह का तापमान पहले ही एक डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है और यही जानलेवा तूफानों, बाढ़ और सूखे की स्थितियां पैदा करने के लिए काफी है। तापमान में यह बढ़ोतरी तेजी से तीन से चार डिग्री की ओर बढ़ रही है और अगर ऐसा हुआ तो जीवन दुश्वार हो जाएगा। यह हम नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की जलवायु परिवर्तन पर सोमवार को जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है। इसमें चेतावनी दी गई है की 2030 तक हिमालय में भी अगर 1.5 डिग्री तापमान बढ़ा, तो विशालकाय ग्लेशियर को देखने पर्यटक हर साल आते हैं, वो विलुप्त हो जाएंगे। पवित्र गंगा नदी सहित कई नदियों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

अभूतपूर्व स्तर की वैश्विक जलवायु अव्यवस्था से बचने के लिए दुनिया को अपनी अर्थव्यवस्था और समाज में बड़ा बदलाव लाना होगा। ग्लोबल वार्मिंग का खतरा हिमालय पर भी मंडरा रहा है।एशिया का वाटर हाउस हिमालय इस वैश्विक तापमान का असर विगत एक दशक में दिखा भी है। इंटरगवर्मेंटल पैनल आफ क्लामेंट चेंज की रिपोर्ट की मानें तो पूरे विश्व में सबसे ज्यादा तापमान उन ठंडे क्षेत्रों का बढ़ रहा है। 2030 तक हिमालय में भी अगर 1.5 डिग्री तापमान बढ़ा, तो विशालकाय ग्लेशियर को देखने पर्यटक हर साल आते हैं, वो विलुप्त हो जाएंगे। पवित्र गंगा नदी सहित कई नदियों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। विश्व में तापमान बढ़ रहा है। आईपीसीसी की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि 2030 से 2040 तक पूरे विश्व का तापमान करीब 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो न सिर्फ विश्व के कोस्टल क्षेत्रों में भयंकर तूफान का खतरा होगा बल्कि विश्व की सबसे लम्बी और युवा पर्वत श्रृंखला हिमालय भी वैश्विक तापमान से अछूती नहीं रहेगी।
यह भी पढ़े : विश्व पर्यटन दिवस विशेष, फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स की यह है हकीकत
बता दे की पिछले दस सालों में हिमालय में 0.8 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ा है और इसका असर भी कृषि, उद्यान और इकोलॉजी पर दिखना शुरु हो गया है। हिमालय पूरे विश्व के मौसम चक्र को बनाता है। तापमान बढ़ोत्तरी के कारण हिमालयी क्षेत्र में भी तूफान, बाढ़ और अतिवृष्टि की घटनाएं विगत एक दशक में सामने आई है। केदारनाथ त्रासदी, श्रीनगर बाढ़ को अभी कोई भूला भी नहीं है। वैज्ञानिकों की मानें तो उत्तराखंड में कई इलाके ऐसे हैं, जहां पर पहले अच्छी बर्फबारी होती थी। लेकिन, अगर पिछले 10 सालों की बात करें तो ये केवल नाम मात्र है। कार्बन उत्सर्जन में समय रहते कटौती के लिए कदम नहीं उठाए जाते तो इसका विनाशकारी प्रभाव हो सकता है। ग्लोबल वार्मिंग से बुरी तरह प्रभावित होने वाले देशों में भारत शामिल होगा, जहां बाढ़ तथा सूखे जैसी आपदाओं के साथ-साथ जीडीपी में गिरावट भी हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *