मकर संक्रांति का यह है महत्व, हजार साल बाद बना है इस बार यह अद्भुत संयोग

देहरादून। मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। मकर संक्रान्ति पूरे भारत धूमधाम से मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। क्योंकि इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिये इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं। इस बार मकर संक्रांति पर अद्भुत संयोग बन रहा है। लेकिन इस अद्भुत संयोग में लाभ पाना तभी संभव है जब मुहूर्त में स्नान दान किया जाए। इस बार की मकर संक्रांति कई कारणों से खास है।सौरमंडल के अधिष्ठाता सूर्यदेव सोमवार (14 जनवरी 2019) शाम 7 बजकर 53 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मकर संक्रांति से माता शाकंभरी नवरात्र का आरंभ हो रहा है। पौष कृष्ण पक्ष की अष्टमी से पौष पूर्णिमा तक मां शाकम्भरी नवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। इस बार यह मकर संक्रांति से आरंभ हो रहा है। अतः अतिविशेष फलदायी है। पौष पूर्णिमा 21 जनवरी को माता की जयंती है। पुष्य नक्षत्र है और खग्रास चंद्रग्रहण भी है। आरंभ भी सोमवार से ही हो रहा है। शाकंभरी को वनस्पति की देवी माना जाता है। सब्जियों से पूजा की जाती है। इन्हें मां अन्नपूर्णा माना जाता है। पांडवों ने परिजन हत्या दोष मुक्ति के लिए मां की पूजा आराधना की थी। शाकंभरी मां के तीन शक्तिपीठ हैं। पहला सीकर, राजस्थान में है। यह सकराय माताजी विख्यात है।दूसरा राजस्थान के सांभर जिले में शाकंभर में स्थित है। तीसरा सहारनपुर उत्तरप्रदेश में है। पुराणों के अनुसार दानवों के अत्याचार से भीषण अकाल से पीड़ित धरा को बचाने माता ने अवतार लिया। वे हजारों नेत्रों से इन नौ दिनों तक रोती रहीं। इससे हरियाली पुनः स्थापित हुई।

संक्रांति काल में सिद्ध योग है।  यह योग समस्त कार्यों को सिद्ध करने वाला है। पुण्य बढ़ाने वाला है। इसके प्रभाव से उत्तरायण सूर्य इस बार समस्त चराचर के लिए सुख सौख्य लेकर आए हैं। धनधान्य समृद्धि बढ़ाने वाले हैं। सिद्ध योग 15 तारीख को प्रातः 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इस पुण्यकाल में स्नान-दान से लोगों के समस्त कार्य सिद्ध होंगे। बता दें की महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का दिन चुना था। लोग इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर ब्राह्मणों को कंबल, खिचड़ी आदि का दान करें।सम्पूर्ण भारत में मकर संक्रान्ति विभिन्न रूपों में मनाया जाता है।

वहीं शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है।

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