पुनम हत्याकांडः1 लाख 20 हजार मोबाइल नंबरों की जांच के बाद अब तीन का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट

Three people will have polygraph tests in the poonam murder case

उत्तराखंड को दहला देने वाला हल्द्वानी का पूनम हत्याकांड पहेली बन गया। इस हत्याकांड के खुलासा करने के पुलिस के दावे भी अब तक हवा हवाई हैं। छानबीन में पुलिस ने करीब एक लाख 20 हजार मोबाइल नंबरों की छानबीन का दावा किया। करीब 52 संदिग्ध नंबर सर्विलांस पर लगाए गए। खुलासे के लिए पुलिस की 18 टीमें लगाई गईं। पुलिस ने करीब 70 युवक और युवतियों से पूछताछ की। लेकिन फिर भी इस मामले में पुलिस के हाथ खाली रहे। अब पुलिस ने दो युवतियों और एक युवक को सीजेएम कोर्ट में पेश कर अदालत से तीनों के लाई डिटेक्टर टेस्ट (पॉलीग्राफ टेस्ट) की अनुमति मांगी थी। जिसके बाद तीनों के बयान के आधार पर अदालत ने  पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति दे दी है।

बता दें कि  27 अगस्त 2018 की रात लूटपाट के दौरान बदमाशों ने पूनम पांडेय की धारदार हथियाराें से हत्या कर दी थी, इस हमले में उनकी बेटी अर्शी भी गंभीर रुप से घायल हो गई थी। हत्याकांड के अगले दिन ही पुलिस ने जल्द खुलासे का दावा तो ठोंक दिया था, लेकिन समय के साथ उसकी पोल खुलती चल गई। एसटीएफ और एसआईटी दर्जनों भर लोगों से पूछताछ करने के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।72 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। शक के दायरे में मृतका पूनम पांडेय के करीबी भी शामिल थे। पुलिस को जिन लोगों पर शक है, उनकी संख्या पांच से छह बताई जा रही थी। पुलिस को कातिलों से संबंधित कोई सबूत नहीं मिला। छानबीन में पुलिस ने करीब एक लाख 20 हजार मोबाइल नंबरों की छानबीन का दावा किया। करीब 52 संदिग्ध नंबर सर्विलांस पर लगाए गए। करीब 70 युवक और युवतियों से पूछताछ की। लेकिन फिर भी इस मामले में पुलिस के हाथ खाली रहे।

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पॉलीग्राफ टेस्ट की सुविधा सीबीआई के पास

बता दें कि मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार को एसआईटी के गठन का आदेश दिया था। डीजीपी ने एएसपी अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। इस मामले में दो युवतियों और एक युवक ने पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए पुलिस को सहमति दी थी। एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि हत्याकांड के खुलासे के लिए तीन लोगों को कोर्ट में पेश कर बयान दर्ज कराया गया। तीनों के बयान के आधार पर अदालत ने  पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति दे दी है। गौरतलब है कि पॉलीग्राफ टेस्ट की सुविधा सीबीआई के पास है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद अब पुलिस सीबीआई से पॉलीग्राफ टेस्ट का अनुरोध करती है। इसके बाद सीबीआई की दिल्ली स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री के वैज्ञानिक टेस्ट के लिए तारीख तय करते हैं।

ऐसे होता है  पॉलीग्राफ टेस्ट

यह टेस्ट चार बिंदुओं पर होता है। इसमें हृदय गति, श्वसन गति और पसीने की जांच की जाती है। जिस व्यक्ति का टेस्ट होता है उसके हाथ, अंगुली, हृदय व श्वसन जांच के लिए मशीन लगाई जाती है। यह मशीन कंप्यूटर से लिंक रहती है। केस से जुड़े पुलिस के जांच अधिकारी से केस की पूरी ब्रीफ लेते हैं। इसके आधार पर 20 प्रश्न तैयार किए जाते हैं। पहले तीन सवाल सामान्य होते हैं। चौथा सवाल केस संबंधित होता है। इसमें पॉलीग्राफ टेस्ट देने वाले व्यक्ति को हां या ना में ही जवाब देना होता है।

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