यह है बेरोजगारी की सच्चाई,चार पदों के लिए हजारों बेरोजगार युवाओं ने लगाई दौड़

truth of unemployment, thousands of unemployed youths run for four post

देश में बेरोजगारी का आलम यह है कि यहां केवल चार पदों के लिए दो हजार से अधिक बेरोजगार युवाओं ने दौड़ लगाई। प्रदेशिक सेना भर्ती के अंतिम दिन ट्रेडमैन के चार पदों के लिए हुई भर्ती में सात राज्यों के दो हजार से अधिक युवाओं ने दम दिखाया। भर्ती के लिए बृहस्पतिवार सुबह तक मैदानी क्षेत्रों से युवा यहां पहुंचने में थे। सेना की ओर से सभी युवाओं को भर्ती में शामिल होने का मौका दिया गया।

बता दें कि प्रादेशिक सेना 111 इंफेंट्री बटालियन (टीए कुमाऊं) इलाहाबाद की ओर से चार दिनों से सेना मैदान में सात प्रांतों उत्तराखंड, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा के युवाओं की भर्ती की जा रही है। 79 जीडी और चार ट्रेडमैन (क्लर्क, वॉशरमैन एक-एक, हाउस कीपर दो) की भर्ती के लिए करीब 15 हजार युवाओं का हुजूम यहां उमड़ा।अकेले यूपी और उत्तराखंड से करीब 11 हजार युवाओं ने अपनी किस्मत आजमाई। बृहस्पतिवार को अंतिम दिन दो हजार से अधिक युवा भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए। सुबह सात बजे से युवाओं की 1600 मीटर की दौड़ हुई। इसमें सफल रहे युवाओं की शारीरिक फिटनेस जांची गई।भर्ती से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि सफल युवाओं की मार्च में लिखित परीक्षा होगी। भर्ती के बाद युवा टनकपुर और हल्द्वानी जाने वाले वाहनों पर बैठकर निकल गए। अलबत्ता अब भी नगर में सैकड़ों युवा हैं।प्रादेशिक सेना 111 इंफ्रेंटी बटालियन (टीए कुमाऊं) इलाहाबाद की ओर से 11 से 20 दिसंबर तक फैजाबाद में 183 पदों के लिए खुली भर्ती होगी। सैन्य अधिकारियों ने बताया कि इसमें 13 दिसंबर को उत्तराखंड के युवाओं की भर्ती की जाएगी।
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देश के गांवों कसबों में आज जो मारामारी सरकारी नौकरियों की है वह साफ जाहिर करती है कि देश का माहौल ऐसा है कि अपनी मेहनत के बलबूते पर अच्छी जिंदगी बिताना हरेक के बस का नहीं। सरकार नौकरियां देने के कितने वादे करती रहे, असल यही है कि आज न खेतों में नौकरियां हैं, न कारखानों में, न दुकानों में और न दफ्तरों में। दूसरे कई देशों में सदियों तक सेना में भरती के लिए जबरदस्ती की जाती थी पर भारत में हमेशा ही इसे नियामत समझा गया है क्योंकि इस में पैसा, परमानैंसी और पावर तीनों हैं। यह बेरोजगारी का हल नहीं है, यह बदन पर हर जगह बहते नासूरों को मैले कपड़ों से ढकना भर है।

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