यरुशलम में अमेरिकी दूतावास खुलने से भड़की हिंसा, 58 की मौत और 2,700 घायल

US Embassy opened in Jerusalem, violence erupted, 58 killed and 2,700 injured

अमेरिका ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी का दर्जा देते हुए वहां अपना दूतावास स्थापित कर दिया है। 70 साल पुरानी विदेश नीति के उलट उसके इस कदम से पूरा अरब जगत और खुद अमेरिकी सहयोगी देश भी नाराज हो गए हैं। तेल अवीव से यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के शिफ्ट किये जाने पर गाजा-इजरायल सीमा पर फिलीस्तीनी प्रदर्शनकारियों ने भारी विरोध प्रदर्शन शुरू किया। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इजराइली सेना की गोलीबारी में 58 फिलीस्तीनियों की मौत हो गई जबकि 2,700 घायल हो गए। यह 2014 के बाद से सबसे भीषण हिंसा है।

खबरों के मुताबिक, अमेरिका के कदम के विरोध में हजारों लोग गाजा सीमा पर पहुंचे थे। विरोध के बीच कुछ लोग पथराव करते हुए बाड़ के नजदीक पहुंच गए और वे उसे पार करने की कोशिश करने लगे। उस पर इजरायली सुरक्षाकर्मियों ने मोर्चा संभाल रखा था। जिसके बाद उन्होंने गोलीबारी की।प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस के साथ-साथ फायरिंग का भी इस्तेमाल किया गया था।इसमें कम से कम 58 प्रदर्शनकारी मारे गए। गाजा में हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अब तक इजरायली गोलीबारी में 52 लोग मारे गए हैं और लगभग 2,771 अन्य घायल हुए हैं।इनमें कम से कम 200 लोग 18 साल से कम उम्र के तथा 11 पत्रकार शामिल हैं।फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और इजरायली सैनिकों पर पथराव किया।वाशिंगटन के ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन थिंक टैंक में फिलीस्तीनी नेतृत्व के पूर्व सलाहकार खालिद एल्गीन्डी ने कहा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले को शांत करने के लिए कुछ भी नहीं किया, उन्हें कम से कम इजराइली सेना को फिलिस्तीन प्रदर्शनकारियों पर गोलबारी करने से रोकना चाहिए।’ बता दें कि यह हिंसा यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के शिफ्ट किये जाने को लेकर हुई है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप, उनके दामाद जेयर्ड कुश्नर और वित्त मंत्री स्टीवन नुचिन के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था।

ऐतिहासिक है शहर
यरुशलम की आबादी 8.82 लाख है। शहर में 64 फीसद यहूदी, 35 फीसद अरबी और एक फीसद अन्य धर्मों के लोग रहते हैं। शहर का क्षेत्रफल 125.156 वर्ग किमी है। इजरायल और फलस्तीन, दोनों ही अपनी राजधानी यरुशलम को बनाना चाहते थे। इस ऐतिहासिक शहर में मुस्लिम, यहूदी और ईसाई समुदाय की धार्मिक मान्यताओं से जुड़े प्राचीन स्थल हैं।1947 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा यरुशलम के विभाजन का प्लान रेखांकित किया गया था। इसका मकसद यरुशलम को अलग अंतरराष्ट्रीय शहर के रूप में परिकल्पित करना था।1948 में इजरायल के आजाद होने पर शहर का विभाजन हुआ। 1949 में युद्ध समाप्त होने पर आर्मिटाइस सीमा खींची गई। इससे शहर का पश्चिमी हिस्सा इजरायल और पूर्वी हिस्सा जॉर्डन के हिस्से आया।1967 में हुए छह दिनी युद्ध में इजरायल ने जॉर्डन से पूर्वी हिस्सा भी जीत लिया। शहर को इजरायली प्रशासन चला रहा है। लेकिन फलस्तीन पूर्वी यरुशलम को भविष्य की अपनी राजधानी के रूप में देखता है।

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ब्रिटेन ने यरुशलम में अपना दूतावास खोलने से साफ मना किया

अमेरिकी दूतावास को तेलअवीव से यरुशलम में स्थानांतरित करने के लिए 1995 में अमेरिकी कांग्रेस में कानून पारित हुआ। इजरायल ने नए दूतावास के लिए 99 साल के लिए एक डॉलर सालाना किराये पर अमेरिका को यरुशलम में जमीन भी उपलब्ध कराई। लेकिन 1995 के बाद से सभी अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर इसे टालते रहे। इसके लिए वे प्रत्येक छह महीने में एक अधित्याग पत्र पारित करते हैं।ब्रिटेन ने यरुशलम में अपना दूतावास खोलने से साफ मना कर दिया है। हालांकि कई छोटे देश वहां दूतावास खोलने के इच्छुक हैं। ग्वाटेमाला 16 मई को तेलअवीव से दूतावास यहां स्थानांतरित करेगा वहीं पराग्वे इस महीने के आखिरी तक। बीते दिसंबर में 128 देशों ने संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग करके मंशा जाहिर की थी कि अमेरिका यरुशलम को इजरायल की राजधानी का दर्जा रद करे।

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