उत्तराखंड आयुर्वेद विश्विद्यालय द्वारा ‘उच्च शिखरीय औषधीय एवं सगंध वनस्पती के संरक्षण एवं संवर्धन संगोष्ठी का आयोजन

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्विद्यालय, देहरादून के बायोमेडिकल संकाय द्वारा राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (आयुष मंत्रालय, भारत सरकार) के प्रयोजन से द्वि दिवसीय अंतराष्ट्रीय संगोष्टी का आयोजन देहरादून के फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में स्थित आई.सी.एफ़.आर.ई. ऑडिटोरियम में दिनांक 29-30 नवंबर 2019 को किया जा रहा है।

‘उच्च शिखरीय औषधीय एवं सगंध वनस्पती के संरक्षण एवं संवर्धन’ विषयक इस संगोष्ठी का औपचारिक शुभारम्भ दीप प्रज्वलन व धन्वंतरि वंदना के साथ 29 नवंबर 2019 के पूर्वाह्न में फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में स्थित आई.सी.एफ़.आर.ई. प्रेक्षागृह में किया गया।

इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री डॉ हरक सिंह रावत जी मुख्य अतिथि रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड आयुर्वेद विश्विद्यालय के कुलपति माननीय प्रोफेसर (डॉ) सुनील कुमार जोशी द्वारा की गयी।

कार्यक्रम में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्विद्यालय की कुलसचिव प्रो. (डॉ) माधवी गोस्वामी तथा आयुर्वेद संकाय, मुख्य परिसर, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्विद्यालय के निदेशक प्रो. (डॉ) राधा वल्लभ सती भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर युकोस्ट उत्तराखंड के डायरेक्टर जनरल डॉ राजेन्द्र डोभाल, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के उप सी.ई.ओ. डॉ. विक्रम सिंह, हिमालया ड्रग कंपनी के अध्यक्ष डॉ एस. फारूक की गरिमामयी उपस्थिति रही।

संगोष्ठी के स्वागत उद्बोधन में प्रो (डॉ) सती ने उच्च शिखरीय वनस्पतियों के शोध के महत्वों का वर्णन करते हुए इनके संरक्षण व संवर्धन हेतु योजनाओं के बनाने का आह्वाहन किया।

इस अवसर पर संगोष्ठी में प्रस्तुत किये जाने वाले शोध पत्रों की स्मारिका का अनावरण किया गया।

युकोस्ट के डॉ राजेन्द्र डोभाल, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के श्रीमान विक्रम सिंह तथा डॉ फारूक ने अपने अपने उद्बोधन में शोध के महत्वों को बताते हुए, संघोष्ठी की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी।

विश्विद्यालय के माननीय कुलपति प्रो सुनील कुमार जोशी ने इस अवसार पर स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करते हुए यह आश्वाशन दिया कि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्विद्यालय औषधीय वनस्पतियों के शोध की दिशा में अपने दायित्वों को पूर्ण निर्वहन करेगा।

संघोष्ठी के मुख्य अतिथि आयुष मंत्री डॉ रावत ने इस अवसर पर सभी को बधाई दी। उन्होंने बताया आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना मात्रा डिग्री देने के लिए नहीं वरन आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध तथा समाज को आरोग्य प्रदान करने के लिए हुई है।

डॉ रावत ने यह भी बताया कि शोध इस प्रकार से किया जाए कि उसकी वास्तविक उपयोगिता समाज को प्राप्त हो सके, और मात्र प्रकाशन हेतु शोध नहीं होने चाहिएं। अपने तेजस्वी संबोधन में उन्होंने अनेक व्यक्तिगत अनुभव बताने हुए शोध एवं आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार वर्तमान राज्य सरकार जैविक कृषि के प्रोत्साहन में अग्रणी भूमिका निभा रही है।

आयुष मंत्री ने कार्यक्रम में उत्तराखंड बायोडाईवरर्सिटी के माध्यम से विश्वविद्यालय को रु 30 लाख के शोध प्रोजेक्ट दिलवाने की घोषणा की। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में डॉ राजेन्द्र डोभाल द्वारा युकोस्ट के माध्यम से विश्वविधलाय को रु 20 लाख के प्रोजेक्ट दिलवाने की स्वीकृति भी दिलवाई।

कार्यक्रम में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो (डॉ) माधवी गोस्वामी ने अपने उद्बोधन से सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने आयुष मंत्री को कार्य करने की प्रेरणा देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने महाऋषि अगस्त्य के वचनों का संदर्भ देते हुए, सर्वांगीण ज्ञान, अध्यन व शोध के महत्व की ओर भी संकेत किया।

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध वैद्य मायाराम उनियाल जी की पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया।

कार्यक्रम में आई एम पी सी एल के एम डी डॉ पी के प्रजापति, एन बी आर आई के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ ऐ के एस रावत, नागपुर के दत्ता मेघे संस्थान के डॉ श्रीराम जी, प्रोफेसर दिलीप आदि ने भाग लिया।

उक्त संगोष्ठी में भूटान, नेपाल, मोरिशियश आदि देशों से भी प्रतिभागी भाग लेने देवभूमि उत्तराखंड आये हैं। आयोजक डॉ डीके सेमवाल ने सारे विभिन्न देशों से आए वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया , डॉ पी के गुप्ता डॉक्टर, नवीन जोशी, डॉ राजीव कुरेले ने विभिन्न पोस्टर प्रेजेंटेशन में जज के रूप में प्रतिभाग किया।इस कार्यक्रम में डॉ आशुतोष चौहान ,अंकित,धर्मेंद्र राणा ,नरेंद्र प्रसाद , प्रवीण बिजल्वाण, डॉ गुंजन ,डॉ इला तन्ना, डॉ वर्षा,डॉ प्रबोध, डॉ एन के दाधीच ,डॉ सुरेश चौबे, डॉ अनुराग वत्स, डॉ उमापति, डॉ आकांक्षा, डॉ डी सी सिंह, डॉ संजय गुप्ता, डॉ रमेश तिवारी आदि का सहयोग व प्रतिभाग रहा।

इस अवसर पर चार वैज्ञानिक सत्रों का आयोजन हुआ जिसमें विभिन्न देशों से आये प्रतिभागीयो ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।