उत्तराखंड़ में सांस की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल तेंदुए से भिड़ गई बहु गीता, पेश की मिसाल

उत्तराखंड में एक बहु ने अपनी जान जोखिम में ड़ालकर मिसाल पेश की है। अपनी सास को तेंदुए के मुंह का निवाला बनता देख बहू से रहा न गया तो सांस की जान बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। बमनगांव की गीता जोशी को भरसक प्रयास के बावजूद अपनी सास गोविंदी देवी को न बचा पाने का अफसोस है। गीता ने अदम्य साहस का परिचय देकर अपनी सास को तेंदुए का निवाला बनने से तो बचा लिया पर उनकी जान नहीं बचा पाई। इस घटना के बाद से गमगीन गीता ने अभी खाना नहीं खाया है।

जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बमनगांव में रविवार की देर रात आदमखोर तेंदुए ने गोविंदी देवी (70) को घर की चौखट से खींच लिया था। इस दौरान उनकी बहू गीता जोशी गोशाला से लौटी थी। वह कुछ समझ पाती की घात लगाकर बैठा तेंदुआ उनकी सास को खींचकर घर से नीचे की तरफ ले जाने लगा। उसके पीछे भागी गीता ने तीन खेत नीचे जाने के बाद अपनी सास के दोनों पांव पकड़कर अपनी ओर खींचे, परंतु तेंदुआ उसकी सास को दो खेत और नीचे ले गया। इस दौरान गीता द्वारा शोर मचाने पर वह उसे वहीं छोड़ गया। लोग जब तक पहुंच पाते तब तक गोविंदी की मौत हो चुकी थी। गीता सोमवार को पूरे दिन गमगीन होकर खामोश रही।

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हालांकि गीता के इस साहस को काफी सराहा जा रहा है। गोविंदी देवी की मौत के बाद जागे वन विभाग ने बमन गांव को शिकारियों की छावनी में तब्दील कर दिया है। यहां सक्रिय तेंदुए को मारने के लिए लखपत के साथ ही गांव में चार स्थानीय शिकारियों को तैनात किया गया है। शिक्षण संस्थाओं को भी अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है।

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