आजादी के 72 साल बाद भी नहीं बदली उत्तराखंड के गांवों की तस्वीर…

आजादी के 72 साल बाद भी नहीं बदली उत्तराखंड के गांवों की तस्वीर...

देहरादून: (मनीषा नेगी) आजादी के 72 साल बाद भी उत्तराखंड में कई ऐसे गांव है जहा के लोग आज भी सुख सुविधाओं से वंचित है। आलम ये है कि लोगो को कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर जाना पड़ता है,ऐसे में अगर कोई बीमार हो जाय तो उसे अस्पताल तक पहुचाने में इतना समय लग जाता है कि वह रास्ते मे ही दम तोड़ देते है। कई गाँवो की हालत तो ऐसी है कि वहाँ पैदल चलने वाले मार्ग भी सुरक्षित नही है,कही रास्तो पर पुल नही है तो कहीं रास्ते पूरी तरह टूट चुके है,लिहाजा इसका भी कि राज्य सरकार इस मामले पर चुपी तोड़े बैठी है।

ये बात भी किसी ने सच ही कहि है कि पहाड़ का दर्द पहाड़ में रहने वाले लोग ही समझ सकते है,इसलिए शायद सरकार इस ओर ध्यान नही दे रही है। ये जो तस्वीरे आपको दिख रही है ये उत्तराखंड के ही एक गांव की है,जहा अचानक एक औरत की तबीयत खराब हो गयी,सड़क मार्ग न होने के कारण गांव के लोग उन्हें पैदल ही अस्पताल ले गए। ये हालात सिर्फ एक गांव की नही है बल्कि उत्तराखंड के अन्य गांव के लोग भी इसी समस्या से जूझ रहे है,जिसका दर्द कोई नही समझ पा रहा है। वहीं कई गांव तो ऐसे है जहां सड़क निर्माण का कार्य रोक दिया गया है, पिछले कई सालों से इन सड़कों पर सरकार की जेसीबी नहीं चल पाई है।

वहीं अगर चुनाव के समय बात करें तो पहाड़ की जनता से वोट मांगने के लिए नेता कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर उन दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचते है जहां की रोजमर्रा की जिदंगी जीना कठीन है। उन लोगों से वोट मांगकर हजारों वादे करके जाते हैं, लेकिन सरकार बन जाने के बाद कोई भी उन उमिंदों पर खरा नहीं उतरता है। नेताओं के हर बार झूठे वादों से तंग आकर कई गांवों के लोग चुनाव बहिष्कार की मुहिम भी छेड़ते हैं, लेकिन अफसोस इसका फिर भी सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगती है।

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