उत्तराखंडः दो दिन में तीन विद्यार्थियों ने की आत्महत्या, युवा इसलिए उठा रहे है खौफनाक कदम

बच्चों में जरूरत से ज्यादा चीजों की प्रत्याशा बढ़ गई है और सहनशीलता कम हो गई है। इसकी वजह से वह आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। युवा और किशोर जिंदगी को शुरू करने से पहले ही अपने हाथों ही अपने अपनी जीवन लीला को समाप्त कर रहे है। बच्चों और युवाओं द्वारा उठाए जा रहे खौफनाक कदम से मनोवैज्ञानिक भी हैरान है।बता दें कि नैनीताल में दो दिन में तीन विद्यार्थियों ने आत्महत्या कर ली है। जिससे कोहराम मच गया है।

दरअसल नैनीताल में 10 फरवरी को 17 वर्षीय अमन ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। 11वीं के छात्र को पिता की डांट सहन नहीं हो सकी। और उसने बिन कुछ सोचे समझे आत्मघाती कदम उठा लिया। राजकीय इंटर कॉलेज मुवानी पिथौरागढ़ के 12वीं के छात्र राहुल ने नौ फरवरी को पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों ने शिक्षकों पर प्रताडऩा का आरोप लगाया है। वहीं काशीपुर में भी नौ फरवरी को ही 18 साल की छात्रा मानसी ने आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वह खेल किट उपलब्ध कराने की जिद कर ही थी जो पूरी न हुई तो उसने जिंदगी ही खत्म कर ली। आत्महत्या समाज के लिए घातक बन चुकी है। बड़ी उम्र के साथ बच्चे भी अब यह खौफनाक कदम उठाने से पीछे नहीं है। आत्महत्या एक ऐसी समस्या है जो तेजी से बढ़ रही है।

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जिद बन रही मुसीबत

मनोचिकित्सक के अनुसार समाज में जिस तरीके का माहौल हो गया है, शौक बढ़ते जा रहे हैं, उसका सीधा असर व्यवहार पर पडऩे लगा है।,माता-पिता का अपने में व्यस्त रहना, बच्चों का उम्र से पहले ही जरूरत से ज्यादा फ्रीडम की इच्छा करना, सोशल मीडिया एडिक्शन का बढ़ना,परिवार में अक्सर झगड़ा होना,इमोशन पर कंट्रोल न कर पाने से आत्मघाती कदम उठा रहे है। किशोर छात्र और छात्राएं घर में मोबाइल, स्कूटी व फ्रीडम को लेकर जिद करने लगते हैं। यही जिद मुसीबत बन रही है। जिद पूरी नहीं तो उनके व्यवहार में बदलाव आने लगता है।इस नुकसान से बचने के लिए बच्चों को पढ़ाई के अलावा खेल व संगीत गतिविधियों में व्यस्त करना चाहिए।

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