राष्ट्रव्यापी हड़ताल में उत्तराखंड से 68 हजार कार्यकर्ता शामिल

Anganwadi workers included in Uttarakhand nationwide strike

देहरादून : प्रदेश सरकार का स्वप्न पूरा होता नहीं दिख रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हमेशा कहते है की हम प्रदेश को हड़ताली प्रदेश नहीं बनने देंगे। पर यह कथन राज्य की गतिविधियों को देख सिर्फ बाते ही नज़र आरहा है । इन दिनों प्रदेश में अनेको संगठन आंदोलन कर रहे है हड़ताल पर है। कार्य बहिष्कार करने से आम जान को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है।

आज देहरादून में संयुक्त ट्रेड यूनियन के बैनर तले आशा कार्यकर्ता, भोजनमाता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुबह परेड मैदान पर पहुंची और वहां धरने पर बैठ गईं। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर प्रदेश भर की स्कीम कार्यकर्ता हड़ताल पर है। इस दौरान उन्होंने परेड मैदान स्थित धरनास्थल पर धरना देने के बाद डीएम कार्यालय तक कूच किया। यह एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल है जिसमे उत्तराखंड की कार्यकर्त्ता शामिल हुई। इस हड़ताल में उत्तराखंड से 22 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, 35 हजार भोजनमाता और करीब 11 हजार आशा कार्यकर्ता हड़ताल पर रहीं है।

संयुक्त ट्रेड यूनियन के प्रदेश महामंत्री एवं कार्यक्रम के संयोजक वीरेंद्र कंडारी ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार स्कीम वर्कर्स की मांगों को लेकर उदासीन रवैया अपना रही है। केंद्र सरकार पिछले तीन वर्षों से बजट में कटौती कर रही है।राज्य सरकार वहीं स्कीम वर्कर्स की मांगों को नज़रअंदाज़ कर रही है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि आशाओं के लंबे संघर्ष के बाद सरकार उनका मानदेय घोषित नहीं कर रही है।वहीं,आंगनबाड़ी को निजी हाथों में देने और छह से सात माह बाद भी मानदेय का भुगतान नहीं करने से उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सरकार 10 एवं 10 से कम विद्यार्थी वाले विद्यालयों को बंद करके प्रदेश की 3500 भोजन माताओं को हटाने की तैयारी भी कर रही है।
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उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से स्कीम वर्करों की हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी जिला मुख्यालय एवं ब्लॉक मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किया गया। बाद में परेड मैदान से जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकालकर प्रशासन के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार को ज्ञापन भी भेजा गया है।

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