बाबरी विध्वंस की 25वीं बरसी,जमीन पर गरमाई राजनीति, UP में अलर्ट ,

BABRI CASE

6 दिसंबर 1992 हुए बाबरी मस्जिद की 25वीं बरसी को ध्यान में रखते हुए उत्तरप्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है।राम जन्मभूमि विवाद पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जोरदार हंगामा भी हुआ।

बाबरी मस्जिद विध्वंस के 25 साल पूरे हो रहे हैं।देश में कहीं भी सांप्रदायिक तनाव की घटना ना हो। इसलिए पहले ही केंद्र ने सभी राज्यों को सतर्क रहने और शांति सुनिश्चित करने को कहा है। दूसरी
तरफ, विध्वंस की 25वीं वर्षगांठ से ठीक एक दिन पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद स्वामित्व विवाद पर सुनवाई हुई. इसके बाद मसले पर राजनीति भी गर्म हो गई है।

6 दिसंबर को जहां विहिप शौर्य दिवस के रूप में मनाती है, वहीं कुछ मुस्‍लिम संगठन इसे कलंक दिवस के रूप में मनाते हैं। यूपी डीजीपी सुलखान सिंह ने सुरक्षा की दृष्टि से अयोध्या के साथ ही प्रदेश के सभी जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। डीजीपी ने निर्देश दिए कि अगर जरूर पड़े तो धारा 144 लगा दी जाए।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट में अब अगली सुनवाई 8 फरवरी 2018 को होगी. सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने मामले की सुनवाई 2019 तक टालने तक कही है. वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सभी दस्तावेज पूरे करने की मांग की है।

राजनीति गरमाई 

इस मामले में सिब्‍बल द्वारा मामले को टालने की अपील के बाद ही राजनीति तेज हो गई है।बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर सीधा कांग्रेस पर हमला बोल दिया है। खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सीधे राहुल गांधी से पूछा है कि राम मंदिर को लेकर आपकी पार्टी और आपका क्या स्टैंड है? राम मंदिर के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अमित शाह ने कहा कि बीजेपी चाहती है कि जल्द से जल्द इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो और फैसला आए। जिससे अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन सके, जो कि देश की आस्था से जुड़ा हुआ है.

इसके जवाब में कांग्रेस ने कहा कि सिब्‍बल एक वकील की हैसियत से वक्‍फ बोर्ड की तरफ से पैरवी कर रहे हैं और यह उनका व्‍यक्‍तिगत मामला है, पार्टी का विचार नहीं। कांग्रेस ने कहा कि अरुण जेटली ने तो भोपाल गैस ट्रेजडी में आरोपियों की पैरवी की थी तो क्‍या उसे बीजेपी का पक्ष माना जाएगा। कांग्रेस ने कहा कि उसका हमेशा यह रुख रहा है कि अयोध्‍या मसले का हल सुप्रीम कोर्ट में हो।

 सुरक्षा बलों की अतिरिक्‍त तैनाती

गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि ज्यादातर राज्य सरकारों द्वारा संवेदनशील स्थानों, धार्मिक स्थलों, बाजारों, बस टर्मिनलों और रेलवे स्टेशनों पर अतिरिक्त बल तैनात किए जाने की उम्मीद है ताकि कानून व्यवस्था कायम रखी जा सके।

 

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