भीमा- कोरेगांव हिंसा की चश्मदीद युवती का कुएं में मिला शव, हत्या की आशंका

Bhima- Chorus of Koregaon violence, found dead in the well of a woman, fear of murder

कोरेगांव भीमा जातीय दंगों में दंगाई भीड़ द्वारा अपने परिवार के बनाए घर और होटल को आग के हवाले करने की चश्मदीद युवती को मृत पाया गया है। 19 वर्षीय  युवती का शव दंगे से प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए पुनर्वास केंद्र के पास एक कुएं में मिला।19 साल की पूजा साकत भीमा-कोरेगांव हिंसा की एकमात्र चश्मदीद थी। उनकों काफी समय से धमकियां मिल रही थीं।

भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है। दरअसल, इस मामले से जुड़े एक चश्मदीद गवाह की मौत हो जाने से ये मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव में 2 समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा में 1 युवक की मौत हो गई थी। इस हिंसा की एक चश्मदीद गवाह पूजा (19) का शव भीमा कोरेगांव इलाके से कुछ दूरी पर ही मिला है। दो दिन पहले ही पूजा के परिजनों ने शिक्रापुर पुलिस थाने में उसके लापता होने की शिकायत दर्ज की थी। बताया जा रहा है कि पूजा को काफी समय से धमकियां मिल रहीं थीं। इसको लेकर पूजा साकत के परिवार ने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई थी। पूजा के परिवार ने बताया कि उनकी बेटी को बार-बार धमकी दी जा रही थी। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को प्रताड़ित भी किया जा रहा था। खबरों के मुताबिक, 11वीं क्लास की छात्रा पूजा साकत ने अपने परिवार के लिए एक अलग ठिकाने की मांग में कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर भी काटे थे।

पूजा के भाई जयदीप ने बताया, ‘हमने शिकरापुर पुलिस को शनिवार दोपहर पूजा के लापता होने की सूचना दी। जिस कुएं में उसका शव मिला है, वह कोरेगांव भीमा से केवल दो किलोमीटर दूर है। हमें शक है कि गांववालों ने उसे कुएं में कूदने पर मजबूर किया होगा या फिर उसे धक्का दे दिया होगा।’  पुणे पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, ‘हम पूजा के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी जांच करेंगे। पहले हम इसकी पुष्टि करना चाहते हैं कि उसकी मौत का कारण क्या रहा।’ पुलिस ने 306 में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूजा के परिवार वालों का अदालत में घर के जमीन विवाद को लेकर केस चल रहा है। भीमा कोरेगांव दंगे के दौरान घर का नुकसान होने के बाद पूजा का परिवार संघर्ष कर रहा था। जहां उन्होंने घर बनाया था, वहां के मालिक के साथ उनका विवाद चल रहा था।

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आपको बता दें कि 1 जनवरी 2018 को महाराष्ट्र के पुणे के पास भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम में दो समुदायों के बीच हिंसा हो गई थी। इस घटना में एक युवक की मौत हो गई थी। जिसके बाद हिंसा का विस्तार प्रदेश के कई शहरों तक हो गया था। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, अहमदनगर जैसे शहर भीमा कोरेगांव हिंसा की चपेट में थे। इस हिंसा का आरोप एकबोटे तथा संभाजी भिड़े गुरूजी पर लगा था। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने 14 मार्च को एकबोटे को उनके शिवाजी नगर स्थित घर से गिरफ्तार किया था। भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार समस्त हिंदू आघाड़ी के कार्याध्यक्ष मिलिंद एकबोटे को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. एम. मेनजोगे ने गुरूवार को सशर्त जमानत दे दी है।

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