नोटबंदी ने छीनी 50 लाख लोगों की नौकरी, दोगुनी हुई बेरोजगारी दर: रिपोर्ट

नोटबंदी ने छीनी 50 लाख लोगों की नौकरी, दोगुनी हुई बेरोजगारी दर: रिपोर्ट

भारत में 8 नवंबर 2016 की आधी रात मोदी सरकार ने आतंकवाद, भ्रष्टाचार और कालेधन खत्म करने का दावा करते हुए नोटबंदी लागू की थी। उससे भले ही देश से भ्रष्टाचार खत्म न हुआ हो लेकिन पीएम मोदी के इस फैसले ने देश के 50 लाख लोगो से नौकरियां छीन ली है, कई छोटे उद्योग बंद तक हो गए है। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी बेंग्लुरु के सेंटर फॉर ससटेनेबल इम्पलॉयमेंट की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से पिछले दो सालों में करीब 50 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां खो दी हैं। इसके बाद भी देश के हालात अभी तक सुधरे नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 की तीसरी तिमाही यानी सितंबर 2016 से दिसंबर 2016 के बीच शहरी और ग्रामीण लोगों की लेबर पार्टिशिपेशन फोर्स में भागीदारी अचानक कम होने लगी। इसका मतलब है कि सितंबर 2016 नौकरियों में कमी आने लगी। वहीं 2017 की दूसरी तिमाही में इसकी दर में थोड़ी कम आई, लेकिन बाद में नौकरियों की संख्या लगातार कम होती गई, जिसमें कोई सुधार नहीं हुआ।बेरोजगारी के शिकार उच्च शिक्षा ग्रहण कर चुके लोग और कम पढ़े लिखे लोग दोनों हैं। बता दें कि भारत की लेबर मार्केट पर जारी इस रिपोर्ट का आधार कन्ज्यूमर पिरामिड सर्वे रहा। यह सर्वे सेंटर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकॉनमी (CMIE-CPDX) करवाता है। CMIE मुंबई की एक बिजनस इनफॉर्मेशन कंपनी होने के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से काम करनेवाला थिंक टैंक भी है। उनके द्वारा ऐसा सर्वे हर चार महीने में किया जाता है, जिसमें 1.6 लाख परिवारों और 5.22 लाख लोगों को शामिल किया जाता है।

दोगुनी हुई बेरोजगारी दर,गंभीर चिंता का विषय
आपको बता दें कि देश में बेरोजगारी की समस्या साल 2011 से बनी हुई है। साल 2018 तक बेरोजगारी दर छह प्रतिशत तक बढ़ गई जो 2000-2011 के मुकाबले दोगुनी है।  देश में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत रही जो बीते 45 सालों में सबसे ज्यादा है।रोजगार और मजदूरी पर ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2019’ की रिपोर्ट के अनुसार 20-24 आयु वर्ग में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। यह गंभीर चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि यह युवा कामगारों का वर्ग है। यह बात शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के पुरुषों और महिलाओं के वर्गों पर लागू होता है।
असंगठित क्षेत्र पर पड़ा नोटबंदी का गहरा असर
नोटबंदी का सबसे गहरा असर असंगठित क्षेत्र पर पड़ा है। जीएसटी लागू होने के बाद से इस सेक्टर का और भी बुरा हाल है। इस सेक्टर में सबसे ज्यादा लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं कहीं ज्यादा प्रभावित हुई हैं।बड़ी समस्या यह है कि महिलाओं में बेरोजगारी दर अधिक है। यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है।

 

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