उत्तराखंड में फुटबॉल चैम्पियनशिप-आल इंडिया गढ़वाल यूथ कप-2018 का आगाज़

Football championship - All India Garhwal Youth Cup-2011 begins

देहरादून: उत्तराखंड में फुटबॉल चैंपियनशिप में थर्ड आल इंडिया गढ़वाल यूथ कप -2018 का आगाज़ आगामी अप्रैल माह में शुरू होगा। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई है। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में देहरादून फुटबॉल अकादमी के संस्थापक अध्यक्ष / हैड कोच वीरेंद्र सिंह रावत तथा चैंपियनशिप प्रतियोगिता की मुख्य प्रायोजक अर्चना शर्मा ने कहा कि इस चैंपियनशिप प्रतियोगिता का आयोजन राज्य खेल फुटबॉल को प्रोत्साहन देने के लिए किया जा रहा है, तथा हम खेल में प्रतिभाओं को तराशने का काम कर रहे है।

फुटबॉल चैंपियनशिप देहरादून के परेड ग्राउंड में 15 अप्रैल से 22 अप्रैल 2018 तक होगी। इस प्रतियोगिता में देश एवं प्रदेश के समस्त अकैडमी ओर स्कूल के खिलाड़ी प्रतिभाग कर सकते है , प्रतिभाग करने के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि 20 मार्च निर्धारित की गई है। प्रतियोगिता में तीन वर्ग निर्धारित किये गए है, पहली प्रतियोगिता बालक अंडर 15 में आयु वर्ग एक जनवरी 2004 जन्मतिथि तक के बाद के खिलाड़ी, दूसरी प्रतियोगिता बालक अंडर 19 आयु वर्ग में एक जनवरी 2000 जन्मतिथि तक के बाद के खिलाड़ी तथा बालिका वर्ग की सीनियर प्रतियोगिता में आयु वर्ग की कोई सीमा नहीं है।
चैंपियनशिप प्रतियोगिता के ब्रांड एम्बेस्डर जितेंद्र सिंह बिष्ट होंगे, जितेंद्र उत्तराखंड से एकमात्र ऐसे खिलाड़ी रहे है जिन्होंने फीफा वर्ल्ड कप 2017 (अंडर-17) में उपकप्तान के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया था जिसके संस्थापक कोच वीरेंद्र सिंह रावत है। आल इंडिया गढ़वाल यूथ कप -2018 फुटबॉल चैंपियनशिप प्रतियोगिता के मुख्य प्रायोजक वत्स रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड, सहयोगी उत्तराखंड फुटबॉल रेफरी एसोसिएशन, हिल्स डेवलपमेंट मिशन, संस्कार परिवार सेवा समिति, गेम विला गेस्ट हाउस, देहरादून फुटबॉल अकादमी है। रघुबीर बिष्ट ने कहा कि अभी तक राज्य में व्यक्तिगत प्रयासों से बहुत सी खेल प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सफलताएं अर्जित की हैं लेकिन खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है ,उत्तराखंड में खेल प्रोत्साहन के लिए सरकारी उदासीनता सबसे बड़ा कारण है।

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प्रदेश में खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार को एक ‘फेलिसिटेटर’ की भूमिका निभानी चाहिए तथा खेल में अवस्थापना सुविधाओं के लिए अगर निजी क्षेत्र सामने आता है तो सरकार को उसे भरी सब्सिडी प्रदान करनी चाहिए। जिला स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रयासों का और भी बुरा हाल है। अगर जिला का कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय ओर अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करने पहुंच भी जाता है तो भी उसके पीछे सरकारी प्रोत्साहन नहीं होता है।देहरादून फ़ुटबॉल एकेडमी के हेड कोच ने अपने दम पर 7 साल मै 550 खिलाड़ी कोच रेफेरी का भविष्य बनाया है। प्रेस वार्ता में हेड कोच तथा 7 नेशनल अवार्डी वीरेंद्र सिंह रावत, मुख्य प्रायोजक अर्चना शर्मा, समाजसेवी रघुबीर बिष्ट, आचार्य विपिन जोशी, जी एल सडाना, अनिल रावत, पुष्कर नेगी, दिलवर सिंह बिष्ट, जगमोहन सिंह रावत, सुरेन्द्र पयाल, प्रवीण रावत, मित्रानन्द, रौनक राय, प्रकाश मल्ल, अनीता रावत, जूनियाली रावत, ख़ुशी गुरुंग, अमन जखमोला, अमित कांत, नरेंद्र नंदा, आशीष भंडारी पूर्व अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी सी बी थापा आदि उपस्थित रहे।

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