दुनिया की पहली महिला इंजीनियर का गूगल ने बनाया डूडल ,100 साल पहले ऐसे हासिल किया था मुकाम

Google Doodle, the world's first female engineer,

गूगल ने आज दुनिया की पहली महिला इंजीनियर एलिसा लेओनिडा जमफिरेसको के 131वें जन्मदिन पर अपने डूडल के जरिए श्रद्धांजली दी है। बता दें कि एलिसा का जन्म 10 नवंबर 1887 को हुआ था। लिंग भेद की बाधाओं से लड़ते हुए वह विश्व की पहली महिला इंजीनियर बनी थीं। आज उन्हें सारा विश्व याद कर रहा है।

आपको बता दें कि एलिसा को जनरल एसोसिएशन ऑफ रोमेनियन इंजीनियर्स की पहली महिला सदस्‍य होने का भी गौरव प्राप्त है। वह जियोलॉजिकल इंस्‍टीट्यूट ऑफ रोमेनिया के लिए लैब भी चलाती थीं। रोमानिया के गलाटी शहर में 10 नवंबर, 1887 को जन्मी एलिसा ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई उन दिनों की जब महिलाएं इंजीनियर नहीं हुआ करती थी। उस समय रोमेनिया में महिला को पढ़ाई करना काफी कठिन था। ऐसे में पढ़ाई करना और फिर करियर बनने के बीच उनको कई कठिनाइयों को सामना करना पड़ा था। लेकिन सभी परेशानियों का सामना करने के बाद वो दुनिया की पहली महिला इंजीनियर बनीं। अपने दस भाई-बहनों में से एक एलाइसा हाईस्कूल पास करने के बाद बुचारेस्ट के स्कूल ऑफ ब्रिजेज एंड रोज से पढ़ाई करना चाहती थीं, लेकिन लड़की होने के कारण उनका आवेदन रद्द कर दिया गया था। इसके बाद वह जर्मनी के रॉयल टेक्निकल एकेडमी पहुंची, जहां से उन्होंने मकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। वहां भी उन्हें काफी भेदभाव का सामना करना पड़ा। एक बार संस्थान के प्रमुख ने उनसे कहा कि बेहतर होता कि आप चर्च, बच्चे और रसोई पर फोकस करतीं। लेकिन तीन साल बाद यानी 1912 में उन्होंने इंजिनियरिंग में स्नातक कर लिया और विश्व की पहली महिला इंजिनियरों में से एक बन गईं।

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इसके बाद एलिसा जनरल एसोसिएशन ऑफ रोमानियन (AGIR) की मेंबर थीं और साथ ही रोमानिया के जियोलॉजिकल इस्टीट्यूट में प्रयोगशाला को चलाया इसी के साथ उन्होंने कई आर्थिक अध्ययनों का निरीक्षण किया जिसने रोमानिया को कोयला, शेल, प्राकृतिक गैस, क्रोमियम, बॉक्साइट और तांबा जैसे प्राकृतिक संसाधनों शामिल थे।  विश्व युद्ध के दौरान उनकी मुलाकात कॉन्सटैंटिन जमिफरसको से हुई।पहली मुलाकात में ही दोनों को प्यार हुआ और शादी हुई. जिससे उनकी दो बेटियां हुईं। 25 नवंबर 1973 में बुचारेस्ट में उनका निधन हो गया।जिसके बाद साल 1993 में रोमानिया की सरकार ने उनके योगदान को देखते हुए राजधानी बुखारेस्‍ट की एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा था।

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