देश एक होली मनाने के तरीके अनेक , जानें कहाँ किस तरह मनाई जाती है होली

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होली एक ऐसा त्योहार है जो प्रेम, आनंद और मस्ती से भरपूर है। इस दिन दुश्मनों को भी गले लगाकर लोग रंग गुलाल लगाते हैं और दोस्ती की नई शुरुआत करते हैं। भारत में होली का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। क्या आप जानते है भारत में शहर बदलने के साथ -साथ होली को मनाने का तरीका भी बदल जाता है। आज हम आपको बताते है भारत में कहां-कहां किस तरह से होली का त्योहार मनाया जाता है।

उत्तर प्रदेश

यहां पर सप्ताह पहले ही होली का जश्न शुरु हो जाता है। उत्तर प्रदेश में सिर्फ होली रंगों से ही नहीं बल्कि लड्डुओं और लाठियों से भी खेली जाती है। इसे लट्ठमार होली कहा जाता है। इस होली को देखने के लिए देशभर से लोग आते हैं।

उत्तराखंड
उत्तराखंड में होली बड़े खास तरीके से मनाई जाती है। यहां के लोग इस दिन पारंपरिक कपड़े पहनते हैं नृत्य करते हैं। यहां पर इस तरह की होली को बैठकी होली कहा जाता है।

पंजाब

पंजाब में होली को ‘होला मोहल्ला’ कहते हैं जो पवित्र धर्मस्थान श्री आनंदपुर साहिब में होली के अगले दिन मनाया जाता है। यहां पर होली पौरुष के प्रतीक पर्व के रूप में मनाई जाती है। इसीलिए दशम गुरू गोविंदसिंहजी ने होली के लिए पुल्लिंग शब्द होला मोहल्ला का प्रयोग किया। होला मोहल्ला का उत्सव आनंदपुर साहिब में छह दिन तक चलता है। इस अवसर पर, घोड़ों पर सवार निहंग, हाथ में निशान साहब उठाए तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का प्रदर्शन करते हैं।

 

 बिहार
बिहार के लोग अलग तरीके से होली मनाते है। इस दिन फगुआ और जोगिरा गाने का रिवाज है। कई जगहों पर कीचड़ की होली भी खेली जाती है। इसके अलावा यहां लोग भांग पीते हैं और खूब मस्ती करते हैं।

राजस्थान
राजस्थान में होली तीन प्रकार से मनाई जाती है माली होली,गोदाजी की गैर होली और बीकानेर की डोलची होली। माली होली में माली जात के पुरुष महिलाओं पर पानी डालते है और महिलाएं लाठियों से पिटाई करती हैं।

हरियाणा
हरियाणा कृषि प्रधान राज्य में होली के इंद्रधनुषी रंगों की छटा देखते ही बनती है। होली के दिन महिलाएं व्रत रखती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं पारंपरिक लोकगीत गाते हुए समूहों में होलिका दहन के लिए जाती हैं और पूजा अर्चना करती हैं तथा होलिका दहन के पश्चात व्रत खोलती हैं। यहां होली की आग में गेहूं तथा चने की बालें भूनकर खाना शुभ माना जाता है। शाम को गांवों में कबड्डी व कुश्ती प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं। महिलाएं शाम के समय अपने लोक देवता की पूजा के लिए मंदिरों में जाती हैं और प्रसाद बांटती हैं।

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बंगाल

बंगाल में होली को ‘डोल यात्रा’ या ‘डोल पूर्णिमा’ कहते हैं। होली के दिन राधा और कृष्ण की प्रतिमाओं को डोली में बैठाकर पूरे शहर में घुमाते हैं और औरतें उसके आगे नृत्य करती हैं। यह भी अपने आप में एक अनूठी होली है। बंगाल में होली को बसंत पर्व भी कहते है। इसकी शुरुआत रवीन्द्र नाथ टैगोर ने शांति निकेतन में की थी। उड़ीसा में भी होली को डोल पूर्णिमा कहते हैं और भगवान जगन्नाथ जी की डोली निकाली जाती है।

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