उत्तराखंड़ में मानवता शर्मसार;प्रसव पीड़ा पर गर्भवती को बस से उतारा, सड़क पर हुई डिलीवरी, बच्चे ने तोड़ा दम

उत्तराखंड़ में मानवता शर्मसार करने वाली घटना प्रकाश में आई है। जहां एक और राज्य सरकार एयर एंम्बुलेंस लाने की कवायद में लगी है। वहीं दूसरी और गर्भवती महिलाएं सड़क पर बच्चे को जन्म देने को मजबूर है। बताया जा रहा है कि एंबुलेंस न मिलने पर गढ़वाल मंडल ऑपरेटर्स यूनियन की बस में सवार होकर हायर सेंटर श्रीनगर जा रही गर्भवती महिला को सफर के दौरान प्रसव पीड़ा होने पर रास्ते में उतार दिया गया। उसके पति की कॉल पर आपातकालीन सेवा 108 के पहुंचने से पहले महिला ने सड़क किनारे बच्चे को जन्म दे दिया। कुछ ही देर में नवजात की मौत हो गई। महिला को उपचार के लिए रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के अनुसार जच्चा- बच्चा सुरक्षा के दावों कि पोल खोलती यह घटना चमोली जिले के घाट ब्लाक क्षेत्र की एक विवाहिता के साथ हुई। घुनी गांव निवासी मोहन सिंह की 32 वर्षीय पत्नी नंदी देवी को प्रसव पीड़ा के चलते जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया गया। अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे देर शाम हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल से एम्बुलेंस न मिलने पर पति उसे लेकर  जीएमओयू की बस से बेस अस्पताल श्रीनगर के लिए रवाना हुआ।  इस बीच, रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू के निकट नंदी को तेज प्रसव पीड़ा हुई। वह कराहने लगी। आरोप है कि इस पर चालक ने उसे बस से उतार दिया। सवारियों ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जहां पर बस चालक ने गर्भवती को उतारा, वहां से रुद्रप्रयाग शहर की दूरी चार किलोमीटर थी। महिला के पति ने आपातकालीन सेवा 108 को बुलाया, लेकिन जब तक वह आती, महिला को सड़क किनारे ही प्रसव हो गया। उपचार न मिलने से उसकी और बच्चे की तबीयत बिगड़ गई, कुछ देर बाद ही नवजात ने दम तोड़ दिया।  जिसके बाद जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग से पहुंची एंबुलेंस में महिला को उपचार के लिए लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

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प्रसव के दौरान प्रसूता और नवजात ने तोड़ा दम

वहीं उत्तरकाशी के जिला अस्पताल की बदहाल चिकित्सा सेवाओं का खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। बुधवार को प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। तंगहाली में गुजर बसर करने वाले महिला के परिजन अपनी गरीबी को दोष देते हुए महिला का शव लेकर घर लौट गए। डुंडा ब्लाक के मंजगांव निवासी उमेश बिजल्वाण ने मंगलवार को अपनी 37 वर्षीय पत्नी कृष्णा देवी को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बुधवार को प्रसव के दौरान महिला की मौत हो गई, जबकि प्रसव के कुछ घंटों बाद नवजात ने भी दम तोड़ दिया। परिजनों में इलाज में लापरवाही को लेकर रोष तो दिखा, लेकिन वे अपनी गरीबी को कोसते हुए मृतका का शव लेकर गांव लौट गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी और पर्याप्त चिकित्सक नहीं होने से यह अस्पताल रेफरल सेंटर बना हुआ है। ऐसे सवाल यह उठता है कि क्या आम-जन के लिए लगभग एक लाख रुपए प्रति घंटा के किराए  वाली एयर एंम्बुलेंस कारगर होगी। जब उन्हे आम सुविधा तक प्राप्त नहीं हो पा रही है।

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