भगवान राम को इस मंदिर में को मिली थी पापों से मुक्ति

इस मंदिर में भगवान राम को मिली थी पापों से मुक्ति

नई दिल्ली। वैसे तो भारत में अनेकों मंदिर है और प्रत्येक मंदिर का अपना महत्व हैं। जहां प्रत्येक साल देश -विदेश के श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं मोढ़ेरा का विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर, अहमदाबाद से तकरीबन सौ किलोमीटर की दूरी पर पुष्पावती नदी के तट पर स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सम्राट भीमदेव सोलंकी प्रथम  (1022-1063 में) ने करवाया था।

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माना जाता है कि सोलंकी साम्राज्य की राजधानी कही जाने वाली ‘अहिलवाड़ पाटण’ भी अपनी महिमा, गौरव और वैभव को गंवाती जा रही थी जिसे बहाल करने के लिए सोलंकी राज परिवार और व्यापारी एकजुट हुए और उन्होंने संयुक्त रूप से भव्य मंदिरों के निर्माण के लिए अपना योगदान देना शुरू किया। सोलंकी ‘सूर्यवंशी’ थे, वे सूर्य को कुल देवता के रूप में पूजते थे, अत: उन्होंने अपने आद्य देवता की आराधना के लिए एक भव्य सूर्य मंदिर बनाने का निश्चय किया और इस प्रकार मोढ़ेरा के सूर्य मंदिर ने आकार लिया। पुराणों में भी मोढ़ेरा का उल्लेख है। स्कंद पुराण और ब्रह्म पुराण के अनुसार प्राचीन काल में मोढ़ेरा के आसपास का पूरा क्षेत्र ‘धर्मरन्य’ के नाम से जाना जाता था। पुराणों के अनुसार भगवान श्री राम ने रावण के संहार के बाद अपने गुरु वशिष्ठ को एक ऐसा स्थान बताने के लिए कहा जहां पर जाकर वह अपनी आत्मा की शुद्धि और ब्रह्म हत्या के पाप से निजात पा सकें। तब गुरु वशिष्ठ ने श्री राम को ‘धर्मरन्य’ जाने की सलाह दी थी। यही क्षेत्र आज मोढ़ेरा के नाम से जाना जाता है। भारत में तीन सूर्य मंदिर हैं जिसमें पहला उड़ीसा का कोणार्क मंदिर, दूसरा जम्मू में स्थित मार्तंड मंदिर और तीसरा गुजरात के मोढ़ेरा का सूर्य मंदिर शामिल है। इस मंदिर का निर्माण कुछ इस प्रकार किया गया था कि जिसमें सूर्योदय होने पर सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह को रोशन करे। सभामंडप के आगे एक विशाल कुंड स्थित है जिसे लोग सूर्यकुंड या रामकुंड के नाम से जानते हैं।

 

 

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