भगवान विश्वकर्मा की पूजा से होती है व्यापार में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की, पढ़े पूरी खबर

हर साल विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति को मनाई जाती है। माना जाता है इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, इसलिए इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहते हैं। इस बार विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2018 को सोमवार के दिन मनाई जा रही है। ऐसा कहा जाता है कि उन्‍होंने देवताओं के लिए कई भव्‍य महलों, आलीशान भवनों, हथियारों और सिंघासनों का निर्माण किया था। ज्योतिर्विद की मानें तो  इस दिन भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के सातवें धर्मपुत्र के रुप में जन्म लिया था।

पूजा की विधि 
पूजा करने के लिए सबसे पहले स्नान करें और उसके बाद अपनी मशीन को अच्छे से साफ़ कर लें। उसके बाद घर के मंदिर में जाकर विष्णु भगवान और विश्वकर्मा भगवान की पूजा करें और कमंडल में कुछ फूल रखकर भगवान और मशीन पर चढ़ाएं। घर के आंगन में आठ फूलों वाला कमल बनाएं और उसमें सात तरह के अनाज रखें। इस अनाज पर मिट्टी के बर्तन में रखें पानी से छिडकाव करें। अब सात प्रकार की मिट्टी, अनाज, फूलों और दक्षिणा को एक साफ़ कपड़े में लपेटकर रख लें और अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें।

शुभ मुहूर्त: वैसे तो पूजा दिन में कभी भी अपनी सुविधानुसार करे लेकिन दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक ही पूजा करना ज्यादा शुभ है।

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इस दिन ज्यादातर कारखाने, दुकानें बंद रहती है। इस दिन लोग हर्षोल्लास के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, दिल्ली आदि राज्यों में भगवान विश्वकर्मा की भव्य मूर्ति स्थापित कर पूजा की जाती है। जो लोग इंजीनियरिंग, आर्किटेक्‍चर, चित्रकारी, वेल्डिंग और मशीनों के काम से जुड़े हुए वे खास तौर से इस दिन को बड़े उत्‍साह के साथ मनाते हैं। इस दिन लोग एक-दूसरों को शुभकामना संदेश देते हैं। आइए आप भी इन शुभकामना संदेश से अपने दोस्तों को बधाई दें सकते हैं।

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