उत्तराखंड में कम बारिश और बर्फबारी का सेब उत्पादन पर पड़ेगा असर

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में कम बारिश और बर्फबारी से सेब उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने से इसका असर किसानों पर पड़ेगा। कम बारिश और बर्फबारी से यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि इससे सेब उत्पादन पर असर पड़ेगा। प्रदेश में 25600 हेक्टेयर में औसतन हर साल 55 से 60 हजार मीट्रिक टन सेब उत्पादन किया जाता है।

चिलिंग प्वाइंट जनवरी की बर्फबारी से ही मिलता है

उल्लेखनीय है कि उद्यान विभाग के निदेशक बीएस नेगी ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है। वह कहते हैं जनवरी के अंत और फरवरी में भी अगर अच्छी बर्फबारी हो जाए तो पर्याप्त चिलिंग मिल जाएगी।  वहीं उद्यान विभाग के पूर्व उप निदेशक एवं विशेषज्ञ एसएन उपाध्याय बताते हैं कि अच्छे उत्पादन के लिए 1200 से 1400 घंटे तक चिलिंग प्वाइंट की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि सेब को चिलिंग प्वाइंट जनवरी की बर्फबारी से ही मिलता है। वजह यह है कि इस वक्त की बर्फ टिकाऊ रहती है। फरवरी में तापमान बढऩे के कारण बर्फबारी भले ही हो जाए, लेकिन टिकाऊ साबित नहीं होगी। इस बार अब तक न तो बारिश हुई है और न ही बर्फबारी। चिलिंग प्वाइंट न मिल पाने के कारण पौधे को आवश्यक नमी नहीं मिल पाती। फलस्वरूप उत्पादन के साथ ही मिठास पर भी असर पड़ता है। ऐसे में समय पर बारिश और बर्फबारी नहीं होती है तो सेब उत्पादकों पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है।

 

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