महाशिवरात्रि आज , ऐसे करे भगवान शिव की पूजा ,यह है शुभ मूर्त

Mahashivaratri Today, doing such a worship of Lord Shiva

महाशिवरात्रि 13 फरवरी को है, जिसके लिए द्रोणनगरी शिवमय हो चुकी है। श्री टपकेश्वर महादेव, पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर समेत तमाम शिवालय रंग-बिरंगी रोशनी से जगमग हैं ।महाशिवरात्रि 13 फरवरी को मनाई जाए या 14 को, इसे लेकर संशय है। शास्त्रों के मतों का हवाला देते हुये ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि 13 फरवरी को ही व्रत करना और अगले दिन 14 को पारण करना श्रेयस्कर है, जबकि नगर के कई प्रमुख मंदिरों में महाशिवरात्रि केपूजन 13 की आधी रात से 14 फरवरी को दिन भर चलेंगे।

गोमतीनगर के ज्योतिषाचार्य प्रदीप के मुताबिक, 13 फरवरी मंगलवार को रात 10:32 बजे से चतुर्दशी का मान शुरू हो जाएगा, यह 14 की रात 12:26 बजे तक रहेगा। इसी दिन भद्रा-जया का योग भी मिलेगा। बताया कि निर्णय सिंधु-स्कंद पुराण का मत है कि त्रयोदशी केअंत समय में आठवें पहर चतुर्दशी वाले समय में ही व्रत उत्तम है।पूजा समय: 13 फरवरी को रात्रि 12.09 से 1.01 मिनट तक। यह काल शिव की पूजा के लिए श्रेष्ठ है, जिसकी अवधि 51 मिनट है।

राशि के अनुसार करें अभिषेक

  • मेष: गंगाजल, लाल पुष्प, गेहूं।
  • वृषभ: कुशा, जल, दही।
  • मिथुन: दही, दूध, गंगाजल।
  • कर्क: गन्ने का रस, गुलाबी फूल।
  • सिंह: शहदयुक्त जल।
  • कन्या: इत्रयुक्त जल, पीला फूल।
  • तुला: दूध, चावल, जल।
  • वृश्चिक: शक्कर, दूधयुक्त जल, गेहूं।
  • धनु: गंगाजल के साथ शुद्ध घी, गेहूं।
  • मकर: सरसों का तेल और लाल फूल।
  • कुंभ: गंगाजल और दही।
  • मीन: शहद, दूध और जल।

ऐसे करें जलाभिषेक

आचार्य संतोष खंडूड़ी ने बताया कि शिवरात्रि के दिन बेलपत्र, धतूरा, धूप, दीप, मिष्ठान, मौसमी फल, पुष्प, चंदन आदि शिव को अर्पित करना चाहिए। गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद से अभिषेक करें और ऊं नम: शिवाय का जाप करते रहें। पौराणिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति वर्ष भर कोई उपवास नहीं रखता है और वह मात्र महाशिवरात्रि का व्रत रखता है तो उसे पूरे वर्ष के व्रतों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। बता दें कि इससे पूर्व 30 वर्ष पहले महाशिवरात्रि दो दिन मनाई गई थी। शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। शिव रात्रि पर चार प्रहर की पूजा से सभी प्रकार की कामनाएं पूर्ण होती है।
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कांवड़ के जल से भगवान शिव होते हैं प्रसन्न-
शास्त्रों के अनुसार कंधे पर कांवड़ रखकर बम बम का नारा लगाते हुए जो व्यक्ति भगवान शिव का अभिषेक करता है उसे हर कदम पर अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। कांवड़ का जल भगवान शिव को अधिक प्रिय है। भोलेनाथ को गाय के दूध से अभिषेक करने पर पुत्र प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। जबकि गन्ने के रस से लक्ष्मी प्राप्ति, दही से पशु आदि की प्राप्ति, घी से असाध्य रोगों से मुक्ति, शर्करा मिश्रित जल से विद्या बुद्धि, कुश मिश्रित जल से रोगों की शांति, शहद से धन प्राप्ति, सरसों के तेल से महाभिषेक करने से शत्रु का नाश होता है।

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