#MeToo: यौन शोषण के आरोपों से घिरे एमजे अकबर ने विदेश राज्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा

MJ Akbar resigns as Minister of State for External Affairs

#MeToo अभियान के तहत यौन शोषण के आरोपों से घिरे एमजे अकबर ने विदेश राज्यमंत्री पद से बुधवार शाम एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस्तीफे का ऐलान किया। उन्होंने जारी विज्ञप्ति में सिर्फ 8 पंक्तियों और 83 शब्दों (अंग्रेजी में जारी किए गए बयान के अनुसार) का उपयोग करते हुए इस्तीफा दिया।
बता दे की अकबर पर 10 दिन पहले #MeToo अभियान के तहत महिला पत्रकारों ने यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे, तब से अब तक दर्जनभर महिला पत्रकारों ने उनपर यौन उत्पीड़न करने के आरोप लगाए। विपक्ष और सोशल मीडिया के जरिए उनपर लगातार इस्तीफे का दबाव बनाया जा रहा था। जिसके बाद उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा की ”मैंने निजी हैसियत से अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ लड़ने का फैसला किया है। मेरे ऊपर लगे सभी तरह के झूठे आरोपों के खिलाफ मैं कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हूं, यही कारण है कि मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं. मैंने अपना इस्तीफा विदेश मंत्री के कार्यालय को भेज दिया है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को देश सेवा का मौका देने के लिए धन्यवाद देता हूं। ”इससे पहले बुधवार को केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। अकबर रविवार को नाइजीरिया दौरे से लौटे थे, तब से इस्तीफा देने तक 72 घंटे में वे चार केंद्रीय मंत्रियों- अरुण जेटली, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह से मिले थे। बुधवार सुबह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से उनकी मीटिंग हुई। कहा जा रहा है एनएसए से बातचीत में ही मंत्री पद छोड़ना तय हुआ।

वहीं एमजे अकबर की तरफ से दायर मानहानि मुकदमे पर गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई। पत्रकार प्रिया रमानी ने 8 अक्टूबर को अकबर के बारे में एक ट्वीट किया था। इसके बाद अब तक 16 महिला पत्रकार अकबर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगा चुकी हैं। 20 महिलाएं उनके खिलाफ गवाही को तैयार हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि 31 अक्टूबर को अकबर और बाकी गवाहों के बयान सुने जाएंगे। अकबर की तरफ से पैरवी कर रहीं वकील गीता लूथरा ने कहा कि अकबर की 40 साल में तैयार हुई छवि को ऐसा नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। लूथरा ने कहा कि रमानी ने अकबर की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले ट्वीट किए। दूसरा ट्वीट तो स्पष्टत: उनके खिलाफ था, जिसे 1200 लोगों ने लाइक किया। इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने अपने लेखों में इस्तेमाल किया। ये ट्वीट तब तक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं, जब तक कि रमानी कुछ साबित नहीं कर देतीं।

आपको बता दे की अकबर ने इस्तीफे के बाद बयान दिया की, ”मैं अदालत में न्याय के लिए गया हूं। ऐसे में मेरा पद से इस्तीफा दे देना उचित है। मैं इन झूठे आरोपों के खिलाफ लड़ाई लड़ूंगा।” उधर, प्रिया रमानी ने ट्वीट किया, ”अकबर के इस्तीफे के बाद हम सही साबित हो रहे हैं। अब उस दिन का इंतजार है, जब हमें अदालत में न्याय मिलेगा।”

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