राज्य में अब जबरन धर्म परिवर्तन करवाना गैर जमानती अपराध , कड़ी सज़ा का प्रावधान

Now forcibly converted into a state of non-bailable offense

उत्तराखडं में अब जबरन धर्म परिवर्तन करवाने वालों केपीआर कसेगा शिकंजा। कड़े प्रावधान लागू किए गे है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत मंत्रिमंडल ने सोमवार को उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी है। इसके तहत अब जबरन, प्रलोभन, जानबूझकर विवाह या गुप्त एजेंडे के जरिये धर्म परिवर्तन गैर जमानती अपराध होगा।

बता दे की विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में लगभग चार घंटे चली मंत्रिमंडल की बैठक में 45 बिंदुओं पर चर्चा हुई। विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के चलते बैठक में लिए गए फैसलों को संक्षिप्त नहीं किया गया। सूत्रों की मने तो मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड में धर्म परिवर्तन की शिकायतों पर गंभीर रुख अपनाते हुए धर्म स्वतंत्रता विधेयक के फैसलों को लागू किया गया है।

अब राज्य में बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराने के आरोपी को एक वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक जेल भेजा जा सकेगा। अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के मामले में न्यूनतम दो वर्ष की जेल व जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। धर्मपरिवर्तन के मामलों में मां-बाप या भाई-बहन की ओर से मुकदमा दर्ज कराया जा सकेगा। इतना ही नहीं यदि धर्म परिवर्तन कानून का उल्लंघन होता पाया जाएगा तो धर्म परिवर्तन को अमान्य घोषित कर दिया जाएगा। इस स्थिति में तीन माह से एक वर्ष की सजा होगी। धर्म परिवर्तन के लिए एक महीने पहले जिला प्रशासन को सूचित भी करना होगा। सूचना नहीं देने की स्थिति में इसे अमान्य करार दिया जाएगा। यही नहीं यदि धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह किया गया तो उस धर्म परिवर्तन को भी अमान्य घोषित किया जाएगा।
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इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने अहम फैसला लेते हुए दैनिक वेतनभोगी, कार्यप्रभारित, अंशकालिक, संविदा व तदर्थ समेत अस्थायी व्यवस्था पर कार्यरत कार्मिकों को पेंशन नहीं देने के लिए विधेयक को मंजूरी दी। इस कदम से 1.45 लाख अस्थायी कार्यरत कार्मिकों को झटका लगने जा रहा है। इन कार्मिकों को पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन देने के मामले में राहत देते हुए सरकार को निर्देश दिए थे।

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